जब से एक स्कूटी सवार पर विभिन्न ट्रैफ़िक उल्लंघनों के लिए 23 हज़ार का चालान ठोका गया है, तब से कई लोगों द्वारा यह सवाल उठाया जा रहा है कि 15 हज़ार की स्कूटी रखने वाले पर 23 हज़ार का चालान करना - यह कहाँ का इंसाफ़ है। इसपर मेरा एक प्रतिप्रश्न है - कोई अगर अपने सौ रुपये के चाकू से किसी की जान ले ले तो उसे उम्रक़ैद की सज़ा देना, क्या यह भी कोई इंसाफ़ है? क्या उसको भी चाकू की क़ीमत यानी अधिक-से-अधिक सौ-दो सौ रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ नहीं दिया जाना चाहिए?
क्या हत्या की सज़ा चाकू की क़ीमत से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए?
- विचार
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- 8 Sep, 2019

जब से नये ट्रैफ़िक नियम लागू हुए हैं, लोग जुर्माने की राशि को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे लोग वाहन की क़ीमत को ट्रैफ़िक नियमों के उल्लंघन की जुर्माना राशि से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन जरा वे सोचें कि किसी के ट्रैफ़िक नियमों का उल्लंघन करने से सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों का कितना बड़ा नुक़सान हो सकता है।
जो लोग वाहन की क़ीमत को ट्रैफ़िक नियमों के उल्लंघन की जुर्माना राशि से जोड़कर देख रहे हैं, वे एक बहुत बड़ी ग़लती कर रहे हैं। वे यह नहीं देख रहे हैं कि जिन ट्रैफ़िक नियमों के उल्लंघनों के लिए इतना भारी जुर्माना किया जा रहा है, उससे किसी और का कितना बड़ा नुक़सान हो सकता है। मसलन तेज़ी से आ रही एक कार किसी की जान ले सकती है और उसके परिवार को उजाड़ सकती है।
नीरेंद्र नागर सत्यहिंदी.कॉम के पूर्व संपादक हैं। इससे पहले वे नवभारतटाइम्स.कॉम में संपादक और आज तक टीवी चैनल में सीनियर प्रड्यूसर रह चुके हैं। 35 साल से पत्रकारिता के पेशे से जुड़े नीरेंद्र लेखन को इसका ज़रूरी हिस्सा मानते हैं। वे देश