loader

मान सरकार के लिए बड़ी चुनौती है पंजाब में अमन-चैन बनाए रखना

पटियाला में हिंदू व खालिस्तान समर्थक सिख संगठनों के बीच हुई झड़प के बाद एक बार फिर तमाम तरह की आशंकाएं सिर उठाने लगी हैं। बीते साल दिसंबर में लुधियाना की जिला अदालत में हुए धमाके के बाद एक बार फिर पंजाब का माहौल तनावपूर्ण होता दिख रहा है। 

पंजाब बेहद संवेदनशील सूबा है और लंबे वक्त तक सिख आतंकवाद की चपेट में रहा है जिसकी वजह से हजारों सिखों और हिंदुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। 

पंजाब में पहली बार सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी के लिए इस तरह की हिंसक झड़पों को रोकना और कानून का शासन मजबूत करना एक बहुत बड़ी चुनौती है।

ताज़ा ख़बरें

आईएसआई की नजर 

पंजाब एक सरहदी सूबा है और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर यह आरोप लगता रहा है कि वह पंजाब का माहौल खराब करने की कोशिश में जुटी रहती है। बीते साल हुए किसान आंदोलन के चलते पंजाब का सियासी पारा काफी हाई रहा था। किसान आंदोलन में खालिस्तान समर्थकों की घुसपैठ होने के आरोप केंद्र सरकार ने लगाए थे। 

भगवंत मान सरकार को बेहद संवेदनशील इस राज्य में पुलिस और कानून व्यवस्था को बेहद चुस्त दुरुस्त रखना होगा वरना राज्य का माहौल खराब हो सकता है।

पन्नू की नापाक कोशिश 

प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस का नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू विदेश में बैठकर लगातार सिखों को भड़काता रहता है। वह पंजाब में बैठे सिखों के लिए अलग देश यानी खालिस्तान बनाने के लिए भारत से लड़ने की बात कहता है। इसके जवाब में पंजाब के हिंदू संगठन उसे ललकारते हैं और इस वजह से पंजाब में खालिस्तान समर्थक सिख संगठन और हिंदू संगठनों के बीच तनातनी की स्थिति बनी रहती है।

hindu sikh clash in patiala punjab and khalistan supporters - Satya Hindi
गुरपतवंत सिंह पन्नू

पटियाला में हुई झड़प में भी सीधा मामला यही था। पन्नू सिख रेफरेंडम 2020 के नाम पर भी भारत के सिखों के बीच अलगाववाद को हवा दे चुका है। 

पंजाब से और खबरें
भगवंत मान सरकार के पास कामकाज का अनुभव नहीं है और भगवंत मान को भी राजनीति में आए 12 साल ही हुए हैं। पंजाब को संभालने के लिए जिस बड़े राजनीतिक व प्रशासनिक अनुभव की जरूरत है वह ना मान के पास है और न ही उनकी पार्टी में किसी और नेता के पास। इसलिए तमाम तरह की चुनौतियां भगवंत मान के सामने खड़ी हैं।
आतंकवाद के दौर में जमकर खून खराबा देख चुका पंजाब और इसके लोग गुरुओं की इस पावन धरती पर अमन-चैन का माहौल चाहते हैं।

विपक्ष को लें साथ 

पंजाब में आईएसआई और विदेशों में बैठे खालिस्तानी नेताओं की साजिश कामयाब ना हो इसके लिए भगवंत मान सरकार को केंद्रीय गृह मंत्रालय का भी पूरा साथ लेना होगा।

इसके साथ ही भगवंत मान को पंजाब का माहौल बेहतर करने में विपक्षी नेताओं के अनुभव का लाभ उठाने से कतई नहीं चूकना चाहिए वरना उनके लिए इस बॉर्डर स्टेट को चला पाना आसान नहीं होगा। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

पंजाब से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें