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कॉलेज में कुर्तियां चेक करतीं सुरक्षा अधिकारी।वीडियो ग्रैब/फ़ेसबुक/ज़नोबिया तुम्बी

अज़ब हाल: कॉलेज में प्रवेश से पहले कुर्तियों की लंबाई की हो रही जाँच

हैदराबाद के एक महिला कॉलेज में छात्राओं को एक अजीब शिक्षा दी जा रही है- कपड़े कैसे पहनें और ‘अच्छे रिश्ते कैसे पाएँ’! ज़िंदगी को बेहतर कैसे बनाएँ, इतिहास से लेकर विज्ञान की समझ कैसे विकसित करें या नौकरी कैसे पाएँ, यह सीख मिले न मिले, कुर्ती कैसे पहननी है, कुर्ती कितनी लंबी हो इसका फ़रमान ज़रूर जारी हो गया है।  

जहाँ यह फ़रमान जारी हुआ है वह है हैदराबाद में महिलाओं के लिए सेंट फ्रांसिस कॉलेज। ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज प्रशासन ने अपनी छात्राओं के लिए एक ड्रेस कोड लागू किया है। छात्राओं को आस्तीन यानी स्लीव वाली कुर्तियाँ पहननी होंगी। इन कुर्तियों के घुटने के नीचे तक होने चाहिए। इनके एक इंच भी छोटा होने पर ड्रेस कोड का उल्लंघन माना जाएगा। नए नियम के तहत शॉर्ट्स, स्लीवलेस या इसी तरह के अन्य कपड़े कॉलेज परिसर में प्रतिबंधित हैं। एक अगस्त से यह नया फ़रमान लागू हुआ है। इस नए नियम को पालन नहीं करने वाली छात्राओं को कक्षाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

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इसके लागू होने के बाद से ही इसका विरोध भी शुरू हो गया है। अब सोमवार को छात्राएँ विरोध में कॉलेज के गेट पर खड़ी होंगी। सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर विरोध जताया जा रहा है। सेंट फ्रांसिस कॉलेज में पूर्व छात्रा ज़नोबिया तुम्बी ने एक फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है कि कॉलेज ने सत्र के बीच में एक नए ड्रेस कोड की घोषणा की। उन्होंने यह भी लिखा कि कॉलेज के अधिकारियों ने छात्र प्रतिनिधियों को बताया था कि ‘एक लंबी कुर्ती हमें शादी के अच्छे प्रस्ताव देगी’। हालाँकि, ड्रेस कोड में तो इस बात का ज़िक्र नहीं है कि ‘शादी के अच्छे प्रस्ताव आएँगे’, लेकिन जब छात्राओं ने विरोध किया तो कॉलेज प्रशासन की ओर से कथित तौर पर छात्राओं के प्रतिनिधियों से कहा गया कि इससे अच्छे रिश्ते आएँगे। हालाँकि, फ़ेसबुक पर छात्राओं के इन आरोपों पर कॉलेज प्रशासन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

यह अजीबोगरीब तर्क है। यह दकियानूसी सोच भी है। शिक्षा क्या सोच को चहारदीवारी में कैद करने का नाम है? क्या आज़ाद ख़्याल होना शिक्षा की राह में रोड़ा है? क्या कपड़ों की लंबाई से शिक्षा का दायरा भी बढ़ेगा? क्या लड़कियों की सोच को सीमित करके महिला सशक्तिकरण की कल्पना की जा सकती है?

कॉलेज की छात्राएँ भी इन्हीं सवालों को उठा रही हैं। छात्राओं के एक समूह ने ड्रेस कोड लागू करने के इस आदेश के ख़िलाफ़ एक वीडियो बनाया है और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। इस वीडियो में उन्होंने कॉलेज प्रशासन के फ़रमान को पीछे ले जाने वाला और आउटडेटेड क़रार दिया है। वीडियो में एक छात्र को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘ऐसे समय में जब हम महिला सशक्तिकरण के बारे में बात कर रहे हैं, ऐसा फ़रमान पूरे अभियान के ख़िलाफ़ है।’

‘छात्राओं को अपमानित किया गया’

कॉलेज की छात्रा रहीं ज़नोबिया तुम्बी कॉलेज के नये नियम को लेकर विरोध जताती रही हैं। उन्होंने कहा कि कुर्ती ‘घुटने से सिर्फ़ एक इंच या उससे भी कम ऊपर’ होने पर छात्राओं को हर रोज़ अपमानित किया गया, छात्राओं को कॉलेज के बाहर खड़ा कराया गया, भले ही उनकी कक्षाएँ और टेस्ट परीक्षा छूट जाएँ। उन्होंने दावा किया कि कॉलेज ने कुर्तियों की लंबाई जाँचने के लिए महिला सुरक्षा गार्ड भी रखे गए हैं।

इसी को लेकर छात्राओं ने नए ड्रेस कोड के ख़िलाफ़ सोमवार को विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। तुम्बी ने फ़ेसबुक पर लिखा, ‘अब समय आ गया है कि हम इस बारे में कुछ करें। हम उनके आंतरिक पितृसत्ता को हमारे कॉलेज के दिनों को बर्बाद करते, अपनी मान्यताओं और जीवन शैली को निर्धारित करते नहीं नहीं देख सकते हैं। हम हर रोज़ अपमानित नहीं हो सकते। ऐसी लड़कियाँ हैं जिन्होंने कहा है कि उनके पास नई कुर्तियाँ ख़रीदने के लिए पैसे नहीं हैं, उन्हें कॉलेज छोड़ने के लिए कहा गया। इसे रोकना होगा।’

ज़ानोबिया तुम्बी ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है कि कॉलेज के अधिकारियों ने छात्र प्रतिनिधियों से कहा कि ‘एक अच्छे उद्देश्य के ख़िलाफ़ खड़ा होना निन्दात्मक है, आपका आवाज़ उठाना निन्दनीय है’। 

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यह सिर्फ़ एक कॉलेज का मामला नहीं है। अक्सर घरों से ही इस तरह की पाबंदियाँ शुरू हो जाती हैं। यह एक सामंती सोच है जो गाहे-बगाहे हर जगह दिख भी जाती है। लड़कियाँ इसी सीमित सोच की उन बेड़ियों को तोड़ने को आतुर हैं। वह पुरुषों के कंधे से कंधे मिलाकर चलना चाहती हैं। स्कूल-कॉलेज की शिक्षा उन्हें इस ओर क़दम बढ़ाने को प्रोत्साहित करती हैं। लेकिन जब इन्हीं स्कूलों-कॉलेजों में उन सामंती सोच को सींचने का काम किया जाएगा तो महिला सशक्तिकरण का दायरा कहाँ तक जाएगा?
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