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छह साल के सबसे बुरे दौर में रुपया, अभी और टूटेगा

भारत का मुद्रा रुपया छह साल के न्यूनतम स्तर पर है, यह अभी और टूटेगा। हालाँकि भारतीय मुद्रा अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के सीधे जुड़ा हुआ नहीं है, पर वह इससे लम्बे समय तक अछूता भी नहीं रहेगा। 
ऐसे समय जब देश की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है, घरेलू बाज़ार पूरी तरह रुपया पर निर्भर है, विदेशी संस्थागत निवेशक इक्विटी बाज़ार से रुपया निकाल रहे हैं। इन लोगों का ध्यान चीनी मुद्रा युआन पर भी लगा हुआ है, जो डॉलर के मुक़ाबले तेजी से उठ-गिर रहा है। 
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और टूटेगा रूपया!

विदेशी निवेशकों के इक्विटी बाज़ार से पैसे निकालने की वजह से भी रूपया टूट रहा है क्योंकि जो भी पैसा निकाला जा रहा है वह डॉलर के रूप में ही बाहर जा रहा है। समझा जाता है कि भारतीय मुद्रा छह साल के न्यूनतम स्तर पर जल्द ही पहुँच सकता है। लेकिन यह डर भी बना हुआ है कि स्थिति और बुरी हो सकती है। 
जेपी मॉर्गन चेज़ का अनुमान है कि रुपया बीते साल के अक्टूबर के स्तर से भी नीचे चला जाएगा। वहीं नोमुरा को आशंका है कि रुपया इस साल के अंत तक 72.50 के स्तर तक पहुँच जाएगा।
इसका मतलब यह है कि एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 72.50 रुपये हो जाएगी। ब्लूमबर्ग ने एक सर्वे में पाया था कि रुपया औसतन 72 प्रति डॉलर तक रहेगा। 
भारतीय अर्थव्यवस्था के मंदी के दौर से गुजरने की वजह से घरेलू माँग और खपत में गिरावट आई है, निर्यात पहले से ही कम है। खपत कम होने की वजह से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर समेत तमाम क्षेत्रों पर बुरा असर पड़ रहा है। बीते शुक्रवार के आँकड़ों से पता चलता है कि इस तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि की दर 5.7 प्रतिशत है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी तथ्य और इसे आगे बढ़ाने वाले कारक पहले से ही कमज़ोर हैं, ऐसे में जीडीपी वृद्धि में कमी जैसी बातों से मुद्रा पर दबाव और बढ़ता है। इससे यह साफ़ है कि रुपया और टूटेगा। 

'सुपर रिच टैक्स' का असर?

बजट में यह प्रावधान रखा गया कि बहुत ही धनी लोगों पर आयकर बढ़ा दिया गया, इसके बाद शेयर बाज़ार से विदेशियों ने पैसे निकालना शुरू कर दिया। जुलाई महीने में 3.8 अरब डॉलर मूल्य के शेयर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बेच डाले। भारतीय मुद्रा पर असका बहुत ही बुरा असर पड़ा। हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते शुक्रवार को इस टैक्स को ख़त्म करने का एलान किया, तब तक काफ़ी नुक़सान हो चुका था। 
पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि चीनी मुद्रा युआन गिरता रहा तो रुपया पर असर पड़ना तय है। यदि युआन डॉलर के मुक़ाबले गिरता रहा तो अमेरिकी मुद्रा मजबूत होगी और डॉलर के मजबूत होने का मतलब है कि रुपया टूटेगा। यानी युआन गिरा तो रुपया भी गिरेगा।

जानबूझ कर अवमूल्यन!

अमेरिका ने कई बार चीन पर आरोप लगाया है कि उसका केंद्रीय बैंक जानबूझ कर युआन का अवमूल्यन कर देता है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। इसकी वजह यह है कि पहले अमेरिका ने चीनी आयातों पर टैक्स बढ़ा कर 25 प्रतिशत कर दिया और बीते दिनों राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 5 प्रतिशत के अतिरिक्त आयात कर की घोषणा की, यानी अमेरिका पहुँचने वाले चीनी उत्पादों पर 30 प्रतिशत कर लगेगा। ऐसे में यह एक चाल हो सकती है कि अमेरिकी बाज़ार में टिके रहने के लिए चीन युआन की क़ीमत जानबूझ कर गिरा ले। युआन की कीमत गिरी तो उसका उत्पाद सस्ता हो जाएगा और कुछ समय तक अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में टिका रह सकता है। 
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