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क्या है महाभियोग, कैसे पद से हटाए जा सकते हैं ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हाउस ऑफ़ रीप्रेज़ेन्टेटिव्स की डेमोक्रेट नेता नैन्सी पलोसी ने राष्ट्रपति पर अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति से कहा कि वह अगले अमेरिकी चुनाव में राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार जो बाइडन के बेटे के कारोबार और व्यापार की सूचनाएँ उन्हें दें। 
अब तक किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को महाभियोग लगा कर हटाया नहीं गया है, पर यह पहला मौका नहीं है, जब वहाँ महाभियोग की प्रक्रिया शुरु की गई हो। इसके पहले 1868 में एंड्र्यू जॉन्सन, 1974 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और 1998 में बिल क्लिंटन के ख़िलाफ़ महाभियोग लाया गया था। लेकिन किसी में प्रक्रिया पूरी नहीं हुई और राष्ट्रपति को पद से हटना नहीं पड़ा। 
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क्या है महाभियोग?

अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दो सदन होते हैं, सीनेट यानी ऊपरी सदन और हाउस ऑफ़ रीप्रेज़ेन्टेटिव्स यानी निचला सदन। इनकी तुलना हम भारत के राज्यसभा और लोकसभा से कर सकते हैं। 

यदि किसी सदस्य को लगता है कि राष्ट्रपति ने अमेरिकी संविधान का उल्लंघन किया है तो वह महाभियोग का प्रस्ताव ला सकता है। धोखाधड़ी, घूसखोरी, जघन्य अपराध या बहुत ही बुरे व्यवहार के आधार पर यह प्रस्ताव लाया जा सकता है।
यह प्रस्ताव निचले सदन या हाउस ऑफ़ रीप्रेज़ेन्टेटिव्स में रखा जा सकता है। प्रस्ताव रखने के बदले आरोपों की जाँच की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। यह ऊपरी सदन यानी सेनेट को भेजा जाता है। सेनेट की एक कमिटी इन आरोपों की जाँच करती है। 
आरोप लगाने वाला सबूत पेश करता है और सेनेट न्यायिक समिति इसकी जाँच करती है। लेकिन महाभियोग की शुरुआत दूसरी जाँच प्रक्रिया से भी हो सकती है। बिल क्लिंटन के मामले में यह हुआ था कि उन पर किसी महिला के साथ यौन संबंध रखने के मुद्दे की जाँच स्वतंत्र जज केनेथ स्टार कर रहे थे। उनकी जाँच को ही सदन में शामिल कर लिया गया था। क्लिंटन पर अदालत में झूठ बोलने का आरोप लगा था। इसे संविधान का उल्लंघन माना गया था। 
US President impeachment process - Satya Hindi
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क्या है प्रक्रिया?

सेनेट में अभियुक्त की सुनवाई होती है। यदि राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ अभियोग लगाया जाता है तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ख़ुद उसकी सुनवाई करते हैं। 

यह अदालत में होने वाली सामान्य सुनवाई की तरह ही होती है। इसमें दोनों पक्षों को यह हक़ होता है कि वे गवाह पेश कर सकते हैं, पेश गवाहों से पूछताछ कर सकते हैं, जिरह कर सकते हैं। 

यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद सेनेट में इस पर मतदान होता है। यदि सेनेट की बैठक में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई ने इसके पक्ष में वोट कर दिया तो राष्ट्रपति को पद से हटा दिया जाता है।
यदि सेनेट चाहे महाभियोग से हटाए गए आदमी पर अलग से मुक़दमा चलाने की अनुमति भी दे सकता है, उसके दुबारा चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध भी लगा सकता है। 

अब तक क्या हुआ?

अमेरिका के हाउस ऑफ़ रीप्रेज़ेन्टेटिव्स में 1789 से लेकर अब तक 62 बार महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक 19 लोगों के ख़िलाफ़ महाभियोग लगा कर उन्हें पद से हटाया गया है। इसमें 15 फ़ेडरल जज, तीन ज़िला जज और 1 सुप्रीम कोर्ट एसोसिएट जस्टिस रहे हैं। 

अब तक तीन बार राष्ट्रपतियों के ख़िलाफ़ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की गई है, रिचर्ड निक्सन,  एंड्रयू जॉन्सन और बिल क्लिटंन।  

मामला एंड्र्यू जॉन्सन का

तत्कालीन राष्ट्रपति एंड्र्यू जॉन्सन पर 24 फरवरी 1868 को टेन्योर ऑफ़ ऑफ़िस एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगा। इस पर 26 मई 1868 को वोटिंग भी हुई। लेकिन मतदान में प्रस्ताव गिर गया। 

रिचर्ड निक्सन का मामला

तत्कालीन राष्ट्रपति निक्सन पर 1973 में आरोप लगाया गया कि उन्होंने क़ानून को अपना काम करने से रोका है, पद का दुरुपयोग किया और कांग्रेस की अवमानना की। हाउस कमिटी ने 30 अक्टूबर, 1973 को जाँच शुरू की। हाउस ऑफ़ रीप्रेज़ेन्टेटिव्स ने महाभियोग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। लेकिन इस वोटिंग के पहले ही 8 अगस्त 1974 को निक्सन ने इस्तीफ़ा दे दिया। इस तरह निक्सन पर महाभियोग लगा, लेकिन उन्होंने प्रक्रिया पूरी होने के पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया। 

बिल क्लिंटन

तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के ख़िलाफ़ 19 दिसंबर को महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। उन पर अदालत में झूठ बोलने और न्याय प्रक्रिया में रुकावट डालने के आरोप लगे। सेनेट ने 12 फरवरी 1999 को उन्हें इन दोनों ही मामलों में बरी कर दिया। 

क्या होगा ट्रंप का?

हाउस ऑफ़ रीप्रेज़ेन्टेटिव्स में डमोक्रेट नेता नैन्सी पलोसी ने सभी डेमोक्रेट सदस्यों को पहले चिट्ठी लिखी, उनकी राय ली। उन्होंने सदन में इनक्वायरी यानी जाँच का प्रस्ताव रखा है। 

अब सबसे पहले सेनेट में एक जाँच समिति बनेगी, जो नैन्सी के दिए गए सबूतों की जाँच करेगी, पूरे मामले की छानबीन करेगी। 

यदि सबूत सही पाए गए तो मामला आगे बढ़ेगा। 

पिछले साल 6 नवंबर को हुए चुनाव के बाद हाउस ऑफ़ रीप्रेजेन्टेटिव्स की सभी 435 सीटों के लिए चुनाव हुए। फ़िलहाल वहाँ डेमोक्रेट्स सदस्यों की संख्या 235 और रिपब्लिकन्स की 1999 है। यानी विपक्ष डेमोक्रेट्स बहुमत में हैं।

लेकिन सेनेट में उल्टी स्थिति है। वहाँ रिपब्लिकन्स 53 सीटों के साथ बहुमत में हैं, डेमोक्रेट्स के पास 45 सीटें हैं और दो इंडीपेन्डेट्स हैं। सेनेट में कुल 100 सदस्य हैं।

मतदान सेनेट में ही होती है, जहाँ ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के पास बहुमत है। लेकिन खुद उनकी पार्टी के बहुत लोग उनके ख़िलाफ़ हैं। महाभियोग की प्रक्रिया दिलचस्प होगी। 

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