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कर्पूरी ठाकुर का भारत रत्न सम्मान लेते उनके पुत्र रामनाथ ठाकुर

चार शख्शियतें मरोणोपरांत भारत रत्न से हुईं सम्मानित

राष्ट्रपति भवन में शनिवार को भारत रत्न सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से 4 शख्शियतों को मरणोपरांत सम्मानित किया। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और चौधरी चरण सिंह, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूठी ठाकुर और प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ एमएस स्वामीनाथन शामिल हैं। 
सम्मान पाने वालों के परिजनों ने देश के इस सर्वोच्च सम्मान को राष्ट्रपति से हासिल किया। पीवी नरसिम्हा राव के बेटे पीवी प्रभाकर राव ने, चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी ने, कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर ने और एमएस स्वामीनाथन की बेटी नित्या राव ने यह सम्मान लिया है। 
भारत रत्न से पूर्व उप प्रधानमंत्री और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को भी सम्मानित किया जाना है। शनिवार के सम्मान समारोह में वह अधिक उम्र और अस्वस्थता के कारण नहीं आ सके। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक 31 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लालकृष्ण आडवाणी के घर जाकर उन्हें इस सम्मान से सम्मानित करेंगी। इस अवसर पर पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा उपस्थित रहेंगे। 

राष्ट्रपति के एक्स अकाउंट से भी इस समारोह और जिन्हें भारत रत्न दिया गया उनके व्यक्तित्व के बारे में जानकारी दी गई है। इस पर कर्पूरी ठाकुर के बारे में बताया गया है कि, वंचित लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास करने वाले कर्पूरी ठाकुर ने बहुत सम्मान अर्जित किया था। 

लोगों ने उन्हें 'जन-नायक' का दर्जा दिया था। कर्पूरी ठाकुर एक स्वतंत्रता सेनानी थे, तथा समानता और समावेशी विकास के प्रबल पक्षधर थे। वे अपने जीवन की सादगी और निःस्वार्थ कार्यों के लिए जाने जाते थे। 
वहीं डॉ. स्वामीनाथन के बारे में बताया गया है कि डॉ. स्वामीनाथन ने भारत को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। उन्हें 'भारत की हरित क्रांति के जनक' के रूप में जाना जाता है।कृषि से जुड़े प्रत्येक आयाम पर अपनी असाधारण समझ के साथ, उन्होंने अनुसंधान, शिक्षा और नई किस्मों तथा विधियों के विकास के लिए अनेक अभियानों का मार्गदर्शन किया। 
उन्होंने अपना पूरा जीवन सभी के लिए भोजन और पोषण सुरक्षा के लक्ष्य के लिए समर्पित कर दिया। वह "सर्वदा-हरित क्रांति" के दृष्टिकोण के साथ सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने हेतु कार्यरत थे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के एक्स अकाउंट से की गई पोस्ट में बताया गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया। चौधरी चरण सिंह में देशभक्ति की भावना प्रबल थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा था। 
जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार में उनके योगदान को तथा अर्थव्यवस्था, विशेषकर ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था की उनकी गहरी समझ को, सम्मानपूर्वक याद किया जाता है। किसानों से उनका जुड़ाव अद्भुत था। 
वहीं, भारत के नौवें प्रधानमंत्री के रूप में, पीवी नरसिंह राव ने दूरगामी आर्थिक सुधारों का नेतृत्व किया था। अपनी युवावस्था में, उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में, विशेषकर निज़ामशाही के दौरान हैदराबाद में कुशासन और उत्पीड़न के विरुद्ध, संघर्ष किया था। अनेक भाषाओं और साहित्यों पर उनका अधिकार सर्वविदित था। 

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क़मर वहीद नक़वी
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