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अयोध्या पर सुनवाई पूरी, पढ़िए क्या हैं हिंदू और मुसलिम पक्ष की दलीलें

अयोध्या मामले में आज ज़बरदस्त हंगामे और हाई वोल्टेज कोर्ट रूम ड्रामा के साथ सुनवाई पूरी हो गई। उम्मीद है कि एक महीने के अंदर यानी 17 नवंबर से पहले इस पर फ़ैसला आ जाएगा। 17 नवंबर को ही मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई रिटायर हो रहे हैं माना जा रहा है कि वह इससे पहले फ़ैसला दे देना चाहेंगे। लेकिन फ़ैसला किसके पक्ष में आने की संभावना है? हिंदुओं या मुसलिमों के पक्ष में? दो महीने से ज़्यादा समय तक सुप्रीम कोर्ट में हर रोज़ की सुनवाई चलने के बाद किनकी दलीलें पुख्ता हैं? क्योंकि कोर्ट भी इन्हीं दलीलों पर फ़ैसला देगा। पढ़िए, दो महीने में किस पक्ष ने क्या दीं दलीलें और किसका पलड़ा भारी रहेगा-

हिंदू पक्ष की दलीलें

  • अकबर और जहाँगीर के समय भारत आए विलियम फ़िंच और विलियम हॉकिन्स जैसे विदेशी यात्रियों ने अपनी लेखनी में अयोध्या और राम मंदिर का ज़िक्र किया है।
  • विलियम फ़ोस्टर ने 'अर्ली ट्रैवल्स इन इंडिया' नाम की किताब प्रकाशित की है जिसमें सात अंग्रेज़ों की भारत यात्रा का वर्णन है। किताब में अयोध्या और राम मंदिर भवन का ज़िक्र किया गया है।
  • स्कंद पुराण का ज़िक्र कर कहा गया कि रिवाज़ है कि सरयू नदी में स्नान करने के बाद रामजन्म भूमि के दर्शन का लाभ मिलता है। इस हिसाब से इसका अस्तित्व काफ़ी पहले से रहा है। 
  • रामजन्मभूमि के प्रमाण के इस सवाल पर निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि 1982 में एक डकैती हुई थी और इसमें उन्होंने रिकॉर्ड खो दिया।
  • रामलला विराजमान ने पुरातत्व विभाग के दस्तावेज़ों को रखा, नक्शे और फ़ोटो कोर्ट को दिखाए।
  • ख़ुदाई के दौरान मिले खम्भों में श्रीकृष्ण, शिव तांडव और श्रीराम के बाल रूप की तसवीर नज़र आती है।
  • नक्शा और रिपोर्ट दिखाकर कहा गया कि परिक्रमा मार्ग पर पक्का और कच्चा रास्ता बना था, आसपास साधुओं की कुटिया थीं, सुमित्रा भवन में शेषनाग की मूर्ति मिली।
  • पुरातत्व विभाग की जनवरी 1990 की जाँच और रिपोर्ट में भी कई तसवीरें और उनके साक्ष्य दर्ज हैं।
  • पक्के निर्माण में जहाँ तीन गुंबद बनाए गए थे, वहाँ बाल रूप में राम की मूर्ति थी।
  • बाबरी मसजिद के भीतर की तसवीरें और मूर्तियाँ यह दर्शाती हैं कि यह सही अर्थों में मसजिद नहीं थी।
  • पुरातत्व सर्वेक्षण में पाए गए स्तंभ से यह पता चलता है कि बाबरी मसजिद की जगह एक विशाल संरचना का अस्तित्व था।
  • अगर जन्मस्थान ही देवता है, अगर संपत्ति ख़ुद में एक देवता है तो ज़मीन के मालिकाना हक़ का दावा कोई नहीं कर सकता।
  • भगवान रामलला नाबालिग हैं और ऐसे में नाबालिग की ज़मीन को न तो बेचा जा सकता है और न ही छीना जा सकता है।
  • भगवान राम का उपासक होने के नाते वहाँ पर पूजा करने का अधिकार है।
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मुसलिम पक्ष की दलीलें

  • मुसलिम पक्ष ने कहा कि विवादित स्थल पर चुपके से भगवान रामलला की मूर्तियाँ रखी गई हैं।
  • बाबरी मसजिद में मूर्ति स्थापित करना छल से हमला करना है। तथ्यों के आधार पर फ़ैसला हो।
  • मुसलिम पक्ष ने बाबरी मसजिद पर बार-बार हमले का ज़िक्र किया। 1934 में हमला किया गया, 1949 में अवैध घुसपैठ हुई और 1992 में इसे तोड़ दिया गया।
  • देश के आज़ाद होने की तारीख़ और संविधान की स्थापना के बाद किसी धार्मिक स्थल का परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।
  • पुरानी तसवीरें रखकर कहा गया कि विवादित ढाँचे में बीच वाले मेहराब के ऊपर अरबी लिपि में बाबर और अल्लाह उत्कीर्ण था। कलमा भी लिखा था।
  • मुसलिम पक्ष के पास विवादित ज़मीन के कब्ज़े के काग़जात नहीं हैं, लेकिन मुसलिम पक्ष वहाँ नमाज़ अदा करता रहा था।
  • मुसलिम पक्ष के पास कब्ज़े का अधिकार नहीं है क्योंकि 1934 में निर्मोही अखाड़ा ने ग़लत तरीक़े से कब्जा कर लिया था और इसके बाद नमाज़ अदा नहीं की गई।
  • बाबरी मसजिद ढहाए जाने के एक दिन पहले यानी 5 दिसंबर 1992 की स्थिति बहाल हो। 
  • सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का उस अंदरुनी हिस्से पर कब्ज़ा रहा था जहाँ पहले गुंबद था।
  • बाहरी हिस्से पर वक़्फ़ बोर्ड के अधिकार पर कभी भी सवाल नहीं किया गया।
  • 1989 से पहले कभी भी भगवान के प्रतिनिधि या निर्मोही अखाड़े ने टाइटल पर दावा नहीं किया।
  • बाहरी हिस्से या बाहरी हिस्से पर पूजा के लिए हिंदू पक्ष का सीमित अधिकार था। 
  • यह सिर्फ़ पूजा करने के लिए था और इससे बोर्ड के टाइटल सूट के अधिकार पर फ़र्क नहीं पड़ता।
  • इस जगह पर ऐतिहासिक रूप से बोर्ड का 1854 से अधिकार है जब ब्रिटिश ने मसजिद को संभालने की अनुमति दी थी।
  • 1885 से 1989 तक किसी भी दूसरे पक्ष की तरफ़ से कोई दावा नहीं किया गया। 
  • एएसआई की रिपोर्ट में भी कोई सबूत नहीं है कि मंदिर को तोड़कर मसजिद बनाई गई थी। 
  • ब्रिटिशों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पूर्वी दरवाज़ा खोला गया क्योंकि क़ानून-व्यवस्था बनाए रखनी थी। और कुछ नहीं। 
  • हिंदू पक्ष ने पूजा करने की अनुमति माँगी और अब इसके टाइटल पर ही दावा कर रहे हैं। 
  • राज जन्मभूमि न्यास का गठन 1989 में इसलिए किया गया कि ज़मीन पर दावा किया जा सके।
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