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'लव जिहाद' का कोई मामला नहीं आया सामने : केंद्र सरकार 

वर्तमान क़ानूनों के तहत 'लव जिहाद' की कोई परिभाषा नहीं है और इस तरह का कोई भी मामला केंद्रीय एजेंसियों की जानकारी में नहीं आया है। यह बात केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में कही। यह पहला मौक़ा है जब सरकार ने 'लव जिहाद' को लेकर स्थिति साफ़ की है। 'लव जिहाद' को लेकर दक्षिणपंथी संगठन लंबे समय तक हंगामा करते रहे हैं। उनके मुताबिक़, 'लव जिहाद' के तहत मुसलिम युवकों द्वारा हिंदू लड़कियों को प्रेम के जाल में फंसाकर उनसे शादी की जाती है और फिर उन्हें धर्म परिवर्तन करने पर मजबूर किया जाता है। 

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी.किशन रेड्डी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अनुच्छेद हमें किसी भी धर्म का प्रचार करने और उसे मानने की आज़ादी देता है। उन्होंने कहा कि 'लव जिहाद' नाम का शब्द मौजूदा नियमों के तहत परिभाषित नहीं है और न ही केंद्रीय एजेंसियों के सामने 'लव जिहाद' का कोई मामला आया है। देश में कई अदालतें जिनमें केरल हाई कोर्ट भी शामिल है उन्होंने भी इस तथ्य की पुष्टि की है। 

गृह मंत्रालय की ओर से यह जानकारी केरल के कांग्रेस नेता बेन्नी बेहनान के सवाल के जवाब में दी गई। बेहनान ने सवाल पूछा था कि क्या पिछले दो साल में केरल में केंद्रीय एजेंसियों के सामने 'लव जिहाद' का कोई मामला आया है। रेड्डी ने आगे कहा, हालांकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) केरल में अलग-अलग धर्मों के बीच विवाह के दो मामलों की जांच कर रही है। 

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केरल में युवक-युवतियों के घर से भाग जाने के कई संदिग्ध मामलों की जांच केरल की जांच एजेंसियों ने की थी और तब इन्हें 'लव जिहाद' का नाम दिया गया था। इनमें से 2018 का हदिया नाम की लड़की का मामला काफ़ी चर्चित हुआ था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दख़ल देना पड़ा था। कोर्ट ने कहा था कि 25 साल की हदिया अपने पति के साथ रहने के लिये स्वतंत्र है जबकि केरल हाई कोर्ट ने हदिया के पिता के अनुरोध पर उसकी मुसलिम युवक के साथ शादी को रद्द कर दिया था। 

कुछ दिन पहले ही केरल में 'लव जिहाद' का मामला तब जोर-शोर से उठा था जब केरल के एक प्रभावशाली कैथोलिक चर्च ने कहा था कि 'लव जिहाद' केरल की वास्तविकता है और ईसाई लड़कियों को फँसा कर उनका यौन उत्पीड़न किया जाता है और फिर ब्लैकमेल कर धर्म परिवर्तन कराया जाता है। चर्च ने यह भी कहा था कि यह काम कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएस के इशारे पर होता है और इन लड़कियों का आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता है। 

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अब सवाल यह है कि जब सरकार ने ख़ुद ही संसद में कह दिया है कि 'लव जिहाद' को वर्तमान क़ानूनों के तहत परिभाषित नहीं किया जा सकता और न ही केंद्रीय एजेंसियों के सामने ऐसा कोई मामला आया है तो क्या दक्षिणपंथी संगठन इस मुद्दे पर समाज का माहौल फिर से तो ख़राब करने की कोशिश नहीं करेंगे। क्योंकि सोशल मीडिया में भी अकसर देखा गया है कि जब भी किसी हिंदू युवती और मुसलिम युवक की शादी का मामला सामने आता है तो दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से इसे 'लव जिहाद' का नाम देकर हंगामा खड़ा करने की कोशिश की जाती है। 

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