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आज़ाद ने कांग्रेस में नंबर दो होने का सोनिया का ऑफर ठुकराया?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस में नंबर दो की पोजिशन पर काम करने के ऑफर को ठुकरा दिया है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज़ाद को बुलाकर यह ऑफर दिया था। बता दें कि गुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस में असंतुष्ट नेताओं के गुट G-23 के नेता हैं। आज़ाद को राज्यसभा चुनाव में पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया है।

हालांकि सोनिया गांधी ने हाल ही में 2024 के चुनाव की तैयारी के लिए बनाए गए पॉलिटिकल अफेयर्स ग्रुप में गुलाम नबी आज़ाद को जगह दी है। 

आज़ाद कांग्रेस में फैसले लेने वाली सुप्रीम बॉडी सीडब्ल्यूसी के भी सदस्य हैं।

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एएनआई के मुताबिक, बातचीत के दौरान सोनिया गांधी और गुलाम नबी आज़ाद के बीच राज्यसभा चुनाव को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई। 

लेकिन सोनिया ने आज़ाद से पूछा कि क्या वह कांग्रेस संगठन में नंबर दो की भूमिका में काम करना चाहेंगे। 

Ghulam Nabi Azad refuses to be No. 2 in Congress organisation - Satya Hindi

एएनआई के मुताबिक, आज़ाद ने सोनिया गांधी से कहा कि मौजूदा वक्त में पार्टी चला रहे युवाओं और उनके जैसे पुराने नेताओं के बीच में जेनरेशन गैप है। उन्होंने कहा कि हमारी सोच और उनकी सोच में अंतर है और युवा नेता पार्टी के बुजुर्ग नेताओं के साथ काम नहीं करना चाहते।

हालांकि यह साफ नहीं है कि कांग्रेस में नंबर दो की पोजिशन पर गुलाम नबी आज़ाद को क्या भूमिका दी जाती। क्या उन्हें पार्टी में उपाध्यक्ष बनाया जाता या फिर कार्यकारी अध्यक्ष। 

समर्थकों ने छोड़ी पार्टी 

बीते महीनों में जम्मू-कश्मीर में गुलाम नबी आज़ाद के समर्थक बड़ी संख्या में कांग्रेस से किनारा कर चुके हैं। गुलाम नबी आज़ाद अपने तमाम बयानों से भी यह जाहिर करते रहे हैं कि पार्टी नेतृत्व के साथ उनके रिश्ते अब पहले जैसे मधुर नहीं हैं। गुलाम नबी आज़ाद के समर्थक जम्मू कश्मीर में उन्हें कांग्रेस का चेहरा देखना चाहते हैं।

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टिकट वितरण पर नाराजगी 

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने गुलाम नबी आज़ाद के नजदीकी समझे जाने वाले और गुट के नेता आनंद शर्मा को भी उम्मीदवार नहीं बनाया है। कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा और वरिष्ठ नेता नगमा ने भी राज्यसभा चुनाव में टिकट के बंटवारे को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की है। 

सुनील जाखड़ के साथ ही हार्दिक पटेल और कपिल सिब्बल जैसे नेताओं के धड़ाधड़ पार्टी छोड़ने के कारण कांग्रेस नेतृत्व पहले से ही परेशान है।
पांच राज्यों के हालिया चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। ऐसे में गुलाम नबी आज़ाद जैसे वरिष्ठ नेताओं का नाराज बने रहना जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
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