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प्रज्ञा का चुनाव लड़ना ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन है?

भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह के चुनाव लड़ने को लेकर तरह तरह के सवाल उठने लगे हैं। उन्होंने अभी तक पर्चा नहीं भरा है, न ही चुनाव प्रचार ही शुरू किया है, पर सवाल यह उठ रहा है कि स्वास्थ्य कारणों से ज़मानत पर रिहा होने वाली मालेगाँव धमाके की यह अभियुक्त चुनाव कैसे लड़ सकती है? क्या उनका चुनाव लड़ना ज़मानत की शर्तों का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन नहीं है? जब वह चुनाव लड़ सकती हैं तो जेल में क्यों नहीं रह सकतीं?
 उनके चुनाव लड़ने का विरोध धमाके में मारे गए एक व्यक्ति के पिता ने ही किया है। मालेगाँव धमाके में मारे गए एक आदमी के पिता ने इस कांड की अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा की ज़मानत के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि एनएआई की अदालत ने स्वास्थ्य के आधार पर साध्वी को ज़मानत दी थी तो वह चुनाव कैसे लड़ सकती हैं। साध्वी को बीजेपी ने भोपाल से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। प्रज्ञा कांग्रेस के दिग्विजय सिंह को चुनौती देंगी। 
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साध्वी प्रज्ञा की ज़मानत रद्द करने की माँग की है। उन्होंने कहा है कि यह ज़मानत प्रज्ञा को स्वास्थ्य के आधार पर दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि साध्वी स्वास्थ्य कारणों से जेल में नहीं रह सकती हैं तो चुनाव कैसे लड़ेंगी?
याद दिला दें कि अदालत में ज़मानत याचिका दायर करते समय साध्वी प्रज्ञा के वकील ने कहा था कि उनकी मुवक्किल स्तन कैंसर से पीड़ित हैं, वह इतनी बीमार हैं कि बग़ैर दूसरे का सहारा लिए चल भी नहीं सकतीं, लिहाज़ा उन्हें ज़मानत दे दी जाए। उस समय प्रज्ञा सिंह ठाकुर जेल में थीं और सरकारी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बंबई हाई कोर्ट की जज शालिनी फन्सलकर जोशी और रंजीत मोरे ने इसे स्वीकार कर लिया था। उन्होंने ज़मानत याचिका में कहा था, 

ज़मानत याचिका के साथ दिए गए मेडिकल सर्टिफ़िकेट से यह साफ़ है कि याचिकाकर्ता को स्तन कैंसर है। मेडिकल सर्टिफ़िकेट से यह भी लगता है कि याचिकाकर्ता बग़ैर दूसरों के सहारे चल भी नहीं सकतीं। यह भी साफ़ है कि उनका आर्युवैदिक उपचार चल रहा है। हमारी राय में आयर्वैदिक उपचार से स्तन कैंसर का इलाज नहीं हो सकता।


शालिनी फन्सलकर जोशी और रंजीत मोरे, जज, बंबई हाई कोर्ट

इसी आधार पर जजों ने प्रज्ञा ठाकुर को ज़मानत दे दी। उन्होंने ज़मानत आदेश में कहा कि इन बातों को ध्यान में रख कर ज़मानत दी जा रही है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता 5 लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा हो सकती हैं। इससे साफ़ है कि साध्वी प्रज्ञा को ज़मानत सिर्फ़ ख़राब स्वास्थ्य की वजह से मिली है। सवाल यह है कि ख़राब स्वास्थ्य की वजह से ज़मानत पर जेल से निकली प्रज्ञा चुनाव कैसे लड़ सकती हैं? क्या यह ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं है? ज़मानत की शर्तों का उल्लंधन होने की स्थिति में ज़मानत तुरन्त खारिज की जा सकती है। 

प्रज्ञा का जवाब

प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक टेलीविज़न चैनल से बात करते हुए अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, 'मैं आतंकवादी नहीं हूँ। मैं पूरी तरह निर्दोष हूँ। लोग मेरे साथ हैं। मेरे साथ आम लोगों की सहानुभूति है क्योंकि वे लोग जानते हैं कि मुझे झूठे मामले में फँसाया गया है।' साध्वी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा है कि उसका तो केंद्रीय नेतृत्व ही ज़मानत पर है। 
प्रज्ञा ठाकुर बिल्कुल सामान्य लगती हैं। वह सामान्य जीवन जी रही हैं, वह गुरुवार को प्रेस के सामने भी आईं और एक टेलीविज़न चैनल के सीधे प्रसारण में भाग लिया। फिर जेल में रहने में क्या दिक्क़त है, यह सवाल उठना लाज़िमी है। 
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