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चीनी कंपनी द्वारा जासूसी किए जाने की ख़बर बेहद गंभीर, जांच करे सरकार: विपक्ष 

इस ख़बर के सामने आने के बाद कि एक चीनी कंपनी भारत में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति सहित आला पदों पर बैठे 10 हज़ार लोगों की जासूसी कर रही है, देश में जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है। विपक्ष ने सरकार से कहा है कि यह बेहद गंभीर मसला है और उसे इसकी जांच करानी चाहिए। बता दें कि अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने यह खुलासा किया है, जिसमें कहा गया है कि चीनी कंपनी ज़ेनहुआ डाटा इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के निशाने पर सीडीएस जनरल बिपिन रावत, न्यायपालिका से जुड़े अधिकारी, कई वर्तमान व पूर्व मुख्यमंत्री हैं और वह सभी का डेटा इकट्ठा कर रही है। 

कांग्रेस ने सरकार से कहा है कि यह जानना बेहद ज़रूरी है कि चीनी कंपनी की यह घुसपैठ कहां तक हुई है और क्या यह डेटा इकट्ठा करने तक सीमित है या उससे भी आगे है। 

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राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने कहा, ‘इसका देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और लोगों की निजता पर गंभीर असर हो सकता है। हमें उम्मीद है कि सरकार लोगों की जानकारियों को सुरक्षित रखने की दिशा में सही क़दम उठाएगी।’ उन्होंने मामले की गहराई तक जांच कराने और कड़ा क़दम उठाने की मांग की। 

कांग्रेस ने कहा है कि हम चीन से ज़मीन, समुद्र और हवा के अलावा साइबर दुनिया में भी लड़ रहे हैं और ऐसे में सरकार को बेहद सतर्क रहना चाहिए। 

पूर्व विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने कहा कि अगर यह रिपोर्ट सच है तो यह निश्चित रूप से बेहद चिंता का विषय है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि क्या मोदी सरकार को इस बारे में नहीं पता था कि भारत के लोगों की जासूसी की जा रही है। उन्होंने कहा कि चीन को इसे लेकर स्पष्ट संदेश दिए जाने की ज़रूरत है। 

इस विषय पर देखिए, वरिष्ठ पत्रकारों की चर्चा। 

तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद सौगत राय ने भी इसे बेहद गंभीर मसला बताया और कहा कि भारत सरकार को इस मसले पर चीन के साथ बात ज़रूर करनी चाहिए। 

चीन के लिए अलग नीति क्यों?

आरजेडी के राज्य सभा सांसद मनोज झा ने कहा कि भारत सरकार की जो नीति पाकिस्तान को लेकर वह चीन को लेकर क्यों नहीं है। उन्होंने चीनी कंपनी की इस जासूसी को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार इसे लेकर जवाब क्यों नहीं दे रही है। इसी तरह बीएसपी के सांसद कुंवर दानिश अली ने कहा कि यह ख़बर आंखें खोल देने वाली है और भारत सरकार चीनी कंपनियों पर आंख मूंद कर भरोसा करती है। 

भारत में चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाते हुए एसपी के राज्य सभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने कहा कि सरकार हमें यह नहीं बता रही है कि ड्रैगन ने हमारी कितनी ज़मीन पर कब्जा कर लिया है। 

शिव सेना नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अनिल परब ने कहा है कि यह भारत सरकार का फर्ज है कि वह केवल महाराष्ट्र के नेताओं को ही सुरक्षा नहीं दे बल्कि चीनी कंपनी जितने लोगों की जासूसी कर रही है, सभी को सुरक्षा दी जानी चाहिए। 

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आकलन में जुटी सरकार

चीनी कंपनी की इस हरक़त के सामने आने के बाद भारतीय अधिकारी यह पता करने में जुट गए हैं कि आख़िर इस कंपनी ने कितना डेटा इकट्ठा कर लिया है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को कितना ख़तरा हो सकता है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, सरकार के आला अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल द्वारा इसका आकलन किया जा रहा है। एक आला अधिकारी ने अख़बार से कहा कि हम इसका भी पता लगा रहे हैं कि हमें अपनी साइबर सुरक्षा से जुड़ी चीजों को कितना अप्रगेड करने की ज़रूरत है। 

एक आला अधिकारी ने अख़बार से कहा, ‘हम चीनी कंपनी के इस ऑपरेशन की सीमा के बारे में पता कर रहे हैं। क्योंकि इसमें राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक की जासूसी होने की बात है, इसलिए राजनीतिक नेतृत्व को ही यह तय करना होगा कि सरकार का इसे लेकर क्या जवाब होना चाहिए।’ अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस पूरी लिस्ट की जांच की जानी ज़रूरी है और साइबर ख़तरों की भी पहचान की जानी चाहिए। 

मुकर गया चीन 

दूसरी ओर भारत में स्थित चीनी दूतावास ने इसमें चीनी सरकार की किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, चीनी दूतावास ने कहा, 'चीन ने किसी भी कंपनी या व्यक्ति को दूसरे देशों से किसी का डेटा, किसी तरह का आंकड़ा और कोई गुप्त जानकारी लेने के लिए कभी नहीं कहा है न ही वह किसी को ऐसा करने के लिए कह सकता है।'

इंडियन एक्सप्रेस ने कहा है कि इस चीनी कंपनी ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात से भी डेटा की चोरी की है। इस कंपनी का ऑफ़िस चीन के गुआंगदांग प्रांत के शेनज़ेन में है।

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