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फ़ोटो साभार- फ़ेसबुक

घोटाले में नहीं था पवार का नाम: बीजेपी नेता खडसे, क्या जबरन फंसाया गया?

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार पर जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के द्वारा केस दर्ज किये जाने के बाद राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है। एनसीपी ने आरोप लगाया है कि उनके नेता को राजनीतिक बदले की भावना से निशाना बनाया जा रहा है। एनसीपी विपक्ष में है और वह ऐसा कह सकती है लेकिन जब यही बात महाराष्ट्र में बीजेपी के वरिष्ठ नेता कहें, तो यह सवाल खड़ा होगा कि क्या पवार को जानबूझकर निशाना बनाया गया है। महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता और पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे के ऐसे ही बयान ने बीजेपी को इस मुद्दे पर बोलने लायक नहीं छोड़ा है। 
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खडसे ने कहा है कि जब वह 2009 से लेकर 2014 तक विधानसभा में विपक्ष के नेता थे तो उन्होंने इस मामले (महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाला) को बेहद बारीक़ी से देखा है। खडसे ने कहा कि उन्होंने इस कथित घोटाले को लेकर कई बार आवाज़ उठाई लेकिन वह इतना दावे के साथ कह सकते हैं कि इस पूरे मामले में कहीं भी शरद पवार का नाम नहीं था। खडसे ने यह बात अपने गृह जिले जलगाँव में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। 

खडसे का बयान आने के बाद बीजेपी को इस मुद्दे पर भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि खडसे के बयान को एनसीपी और कांग्रेस विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनायेंगे, यह तय माना जा रहा है।

खडसे ने आगे कहा, ‘मुझे इस बात पर आश्चर्य होता है कि उनका (शरद पवार) नाम इस मामले में कैसे आ गया।’ खडसे को एक समय महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जाता था लेकिन राज्य सरकार में राजस्व मंत्री रहते हुए भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था। 

पवार के समर्थन में प्रदर्शन

दूसरी ओर, शरद पवार के ख़िलाफ़ केस दर्ज होने के बाद एनसीपी कार्यकर्ताओं ने बुधवार को उनके गृह इलाक़े बारामती में जोरदार प्रदर्शन किया और इसका ख़ासा असर भी दिखाई दिया। बारामती में बड़ी संख्या में दुकानों के शटर डाउन रहे और एनसीपी कार्यकर्ताओं ने पुणे, नासिक, औरंगाबाद, मराठवाड़ा आदि इलाक़ों में प्रदर्शन कर बीजेपी को घेरने की कोशिश की। 

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पवार को महाराष्ट्र ही नहीं देश की राजनीति में बेहद घाघ नेता माना जाता है। पवार किसी समय प्रधानमंत्री पद के दावेदार भी हुआ करते थे और महाराष्ट्र के कई इलाक़ों में आज भी उनका व्यक्तिगत आधार है। ईडी के द्वारा केस दर्ज किये जाने के बाद पवार ने कहा था कि वह किसी भी सहकारी बैंक के निदेशक नहीं रहे और अगर उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है तो वह इसका स्वागत करते हैं। पवार ने यह भी कहा था कि उन्हें पहले से यह अनुमान था कि उनके ख़िलाफ़ इस तरह की कार्रवाई की जा सकती है।

पवार-शाह के बीच जुबानी जंग

हाल ही में जब महाराष्ट्र में आयोजित एक सभा में बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह बयान दिया था कि शरद पवार यह बताएं कि उन्होंने 70 साल में महाराष्ट्र के लिए क्या किया? तो इस पर भी पवार ने तीख़ा पलटवार किया था। पवार ने कहा था कि 55 साल के राजनीतिक सफ़र में वह कभी जेल नहीं गये और जो लोग जेल की यात्रा कर चुके हैं, वे उनसे सवाल पूछ रहे हैं कि उन्होंने 70 साल में क्या किया है? 

बता दें कि पवार के अलावा उनके भतीजे और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार सहित करीब 70 लोगों के ख़िलाफ़ महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससी) के 25 हज़ार करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामला दर्ज किया है। उसी के बाद यह सवाल उठा था कि क्या शरद पवार को जेल की यात्रा कराने की कोशिश हो रही है? 
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चुनाव के मौक़े पर विपक्ष के नेताओं के ख़िलाफ़ जाँच एजेंसियों के कसते शिकंजे से बीजेपी विपक्ष के निशाने पर है और महाराष्ट्र में तो उसे खडसे के बयान का जवाब देना बेहद मुश्किल हो जाएगा। कुल मिलाकर अब यह मुद्दा महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में बहुत बड़ा हो सकता है और बीजेपी को इसका सियासी नुक़सान होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। 

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