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कश्मीर हमला : दुनिया चिंतित, दो परमाणु देशों के बीच बढ़ेगा तनाव

जम्मू-कश्मीर के पुलावामा में हुए आत्मघाती हमले की ख़बर को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। इन सभी रिपोर्टों में यह कहा गया है कि यह घटना भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को बढ़ा सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने तो रक्षा विश्लेषकों के हवाले से लिखा है कि चुनाव सर पर हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीमा पार एक और हमले के लिए मजबूर हो सकते हैं। बीबीसी और वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्टों में भी कुछ ऐसी ही आशंकाएँ जताई गई हैं। 

पुलावामा में हुए आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ़ के 44 जवान शहीद हो गए हैं। कई जवान घायल हैं। पुलिस का कहना है कि आतंकवादियों ने योजनाबद्ध तरीक़े से यह विस्फोट किया है। पाकिस्तान स्थित आतंकवादी गुट जैश-ए-मुहम्मद ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है।

बीबीसी : 1989 के बाद सबसे घातक हमला

बीबीसी ने जम्मू कश्मीर में इस आतंकी घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। एक लंबी प्रकाशित रिपोर्ट में इसने लिखा है कि कश्मीर में 1989 में विद्रोह शुरू होने के बाद भारतीय सुरक्षा बलों पर अब तक का यह सबसे घातक हमला है। 

इसी रिपोर्ट में ही बीबीसी के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय संपादक Ethirajan Anbarsan ने लिखा है, 'यह घटना भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को बढ़ा सकता है। जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तान के कथित समर्थन को लेकर भारत सरकार ने पहले ही ऊंगली उठा दी है। पाकिस्तान इन आरोपों को ख़ारिज करता है।' 

  • Anbarsan यह भी लिखते हैं कि विद्रोहियों को काबू पाने के तौर-तरीक़ों को लेकर हाल के महीनों में भारतीय सुरक्षा बल अपनी पीठ थपथपाते रहे थे, लेकिन यह हमला यह बताता है कि यह संघर्ष विराम अभी भी दूर की कौड़ी है।

न्यूयॉर्क टाइम्स : ‘चुनाव मजबूर न कर दे’

न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी कुछ ऐसी आशंका जताई है कि हाल का यह हमला परमाणु संपन्न दो पड़ोसियों के बीच तनाव को बढ़ा सकता है जो आज़ादी के बाद से तीन युद्ध कर चुके हैं। अख़बार ने अपने ऑनलाइन संस्करण में लिखा है, 'विश्लेषक कहते हैं कि चुनाव सर पर हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीमा पार एक और हमले के लिए मजबूर हो सकते हैं। और यदि ऐसा नहीं हुआ तो कश्मीर पर ख़ुद को कमज़ोर दिखने का जोखिम उठा सकते हैं।'

  • हालाँकि, लंदन में जेन्स इंफ़ोर्मेशन ग्रुप के रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी की राय के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स यह भी लिखता है कि कश्मीर के पहाड़ों पर भारी बर्फबारी की वजह से पाकिस्तान में फ़िलहाल हमला करना तार्किक रूप से असंभव होगा। 

अख़बार ने लिखा है कि हमले की ज़िम्मेदारी मिलिटैंट ग्रुप जैश-ए-मुहम्मद ने ली है जिसे यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेजरी डिपार्टमेंट के द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।

वाशिंगटन पोस्ट : हत्याएँ तनाव बढ़ाएँगी

वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि ये 'हत्याएँ' परमाणु शस्त्रों से संपन्न दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ाएँगी। इसने लिखा है, 'भारत आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को सीमा पार कर भारत द्वारा नियंत्रित क्षेत्र में हमले करने में सहयोग करते रहता है।'

  • इसने अपने ऑन लाइन संस्करण में लिखा है, 'साल 2016 में सुरक्षा बलों ने करिश्माई मिलिटेंट कमांडर बुरहान वानी को मार गिराया। बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए और भारत ने 'और अधिक बल' का प्रयोग किया।'

वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि विद्रोह को दबाने का भारत के ताज़ा प्रयास ने कश्मीरियों को उकसाया है। अख़बार ने लिखा है कि अब जब कभी भी सुरक्षा बल आतंकवादियों को पकड़ने का प्रयास करता है तो स्थानीय लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता है और ये लोग पत्थर फेंक कर ऑपरेशन को फ़ेल करने की कोशिश करते हैं।

डॉन : जैश ने ली ज़िम्मेदारी

पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेज़ी अख़बार डॉन ने पुलवामा हमले पर सीधी और सपाट ख़बर दी है। यानी इसमें घटना के कारण और प्रभाव का विश्लेषण नहीं किया गया है। अलग-अलग स्रोतों के हवाले से डॉन ने मृतकों की संख्या 37 से लेकर 40 तक बतायी है। 

अख़बार ने लिखा है कि इस हमले की ज़िम्मेदारी जैश-ए-मुहम्मद ने ली है। हालाँक़ि अख़बार ने जैश के लिए मिलिटेंट या आतंकवादी संगठन जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया है। अख़बार ने यह भी लिखा है कि नयी दिल्ली पाकिस्तान पर लोगों को उकसाने का आरोप लगाता रहा है जिससे कि हज़ारों नागरिकों की जानें गयीं। इसलामाबाद इऩ आरोपों को ख़ारिज करता रहा है और कहता रहा है वह सिर्फ़ कश्मीरियों के ख़ुद का फ़ैसला लेने के हक़ को डिप्लोमैटिक समर्थन देता रहता है। 

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