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ज़ेनहुआ: सोने-ड्रग्स के तस्कर, मोबाइल चोर, भ्रष्टाचार में शामिल 6 हज़ार लोगों पर नज़र

ज़ेनहुआ को लेकर अब तक सामने आई ख़बरों के मुताबिक़ यह चीनी कंपनी भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ सहित कई मुख्यमंत्रियों और अहम पदों पर बैठे अधिकारियों की जासूसी कर रही है। अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, ज़ेनहुआ द्वारा बनाए गए ओवरसीज की इनफ़ॉर्मेशन डाटाबेस (ओकेआईडीबी) की नज़र भारत के कई वर्तमान व पूर्व न्यायाधीशों और अर्थव्यवस्था से जुड़े स्टार्ट अप्स पर भी है।

लेकिन अब इस अख़बार ने एकदम ताज़ा खुलासा करके बताया है कि ओकेआईडीबी की नज़र अगुस्टा वेस्टलैंड घूसखोरी मामले के अभियुक्त से लेकर मोबाइल फ़ोन चुराने वालों किशोरों, आर्थिक अपराध, भ्रष्टाचार करने वाले सैकड़ों लोगों, आतंकवाद-संगठित अपराध में शामिल, सोने, नशीले पदार्थों की तस्करी, करने वाले 6 हज़ार लोगों पर है।

सत्यम ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रामालिंगा राजू के दोस्तों और परिवार वालों द्वारा बनाई गई 19 कंपनियों, चारा घोटाले और व्यापमं केस पर भी इसकी नज़र है। ओकेआईडीबी आर्थिक अपराधों की निगरानी के मामलों को लेकर भ्रष्टाचार, रिश्वत और धोखाधड़ी तक के मामलों की मॉनीटरिंग कर रही है। 

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ओकेआईडीबी के डेटाबेस में एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (सेबी) के द्वारा प्रतिबंधित की गई 500 से अधिक संस्थाओं के भी नाम हैं। इसके अलावा क़ानूनी रूप से अवैध साबित किये जा चुके नोटों को एक्सचेंज करने के चलते गिरफ़्तार किए गए लोगों की भी जानकारी इस कंपनी के पास है। 

अख़बार के मुताबिक़, ओकेआईडीबी के पास अपराध के मामलों की जो सूची है, उसमें 100 से ज़्यादा मामले आतंक से जुड़े हुए हैं। इसमें भगोड़े दाऊद इब्राहिम से लेकर टाइगर मेमन, 2014 के बर्दवान विस्फोट मामले में एनआईए द्वारा गिरफ़्तार किए गए जमात-उल-मुजाहिदीन ऑफ़ बांग्लादेश के सदस्य, अपहरण, हत्या, लूट, आगजनी के 28 मामलों को लेकर पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ इंडिया के कार्यकर्ता और डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड (सोंगबीजित) के उग्रवादियों का भी जिक्र है। 

इस चीनी कंपनी के पास इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) और 2015 के क्रिकेट वर्ल्ड कप में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग के 40 से ज़्यादा अभियुक्तों का भी रिकॉर्ड है। यहां बताना ज़रूरी होगा कि चीनी कंपनी वीवो को आईपीएल 2018 की स्पॉन्सरशिप के राइट्स मिले थे। 

इसके डेटाबेस में नशीले पदार्थों, सोने और वन्यजीवों की तस्करी के मामलों से जुड़ी जानकारी भी है। बीते कुछ सालों में भारत ने चीन के ऐसे गिरोहों का भंडाफोड़ किया है जो सोने की तस्करी करते थे। इसके अलावा चंदन की लकड़ी, हाथी दांत की भी तस्करी के लिए काफी मांग रहती थी। 

डेटाबेस में दिसंबर, 2013 में मुंबई में 118 करोड़ रुपये क़ीमत की 1.2 टन केटामाइन की तस्करी के संदेह में गिरफ्तार छह लोगों, चंडीगढ़ में एक आईपीएस अफ़सर के निजी सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा 60 करोड़ रुपये मूल्य की 12 किलोग्राम हेरोइन रखने के मामले का भी जिक्र है। 

ज़ेनहुआ के डेटाबेस में अवैध अंग दान के वे मामले भी हैं जो अमृतसर, दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम और नलगोंडा के अस्पतालों में हुए थे। गौरतलब है कि चीन और भारत अंग प्रत्यारोपण कराने वाले अंतरराष्ट्रीय मरीजों की प्राथमिकताओं वाले देश हैं। इस विषय पर देखिए, वरिष्ठ पत्रकारों की चर्चा। 

पीएमओ के अफ़सरों पर नजर

अख़बार ने कहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के आला ब्यूरोक्रेट्स, अहम मंत्रालयों में तैनात आईएएस अफ़सर, राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भी ज़ेनहुआ के ओकेआईडीबी की नज़र में हैं। ऐसे नौकरशाहों की संख्या कम से कम 375 बताई गई है। इनमें से ज़्यादातर लोग अभी नौकरी में हैं और कुछ रिटायर हो चुके हैं। 

राज्य और केंद्र सरकार के अहम विभागों में काम कर रहे नौकरशाहों को मॉनीटर किया जा रहा है। ये नौकरशाह वित्त, क़ानून-व्यवस्था, शहरी विकास सहित कई आला विभागों में तैनात हैं।

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ड्रैगन आख़िर ये सब क्यों कर रहा है, उसे भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, अहम विभागों के आला अफ़सरों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों या भारतीय स्टार्ट अप्स की जानकारी से क्या हासिल होगा। जानकार इसे 'हाइब्रिड वारफेयर' बताते हैं और इसका मक़सद किसी देश से युद्ध किए बिना या बिना सैनिकों का इस्तेमाल किए उस पर अपना दबदबा कायम करना बताया जाता है। \

24 लाख लोगों का डेटा

ब्रिटेन से छपने वाले अख़बार 'द गार्जियन' ने एक ताज़ा ख़बर में कहा है कि चीनी कंपनी ज़ेनहुआ डेटा इनफ़ॉर्मेशन लिमिटेड के पास दुनिया के 24 लाख लोगों की खुफ़िया जानकारियां हैं। इनमें भारत के 10 हज़ार लोगों के अलावा ऑस्ट्रेलिया के 35 हज़ार लोगों की जानकारियां भी शामिल हैं। अख़बार के मुताबिक़, ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा स्थित इंटरनेट 2.0 नामक साइबर कंसलटेन्सी कंपनी ने कहा है कि उसने ज़ेनहुआ के लीक हुए डेटाबेस में से 2.50 लाख लोगों के डेटा निकाल लिए हैं। इनमें 52 हज़ार अमेरिकी, 35 हज़ार ऑस्ट्रेलियाई और 10 हज़ार ब्रिटिश हैं। 

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