loader

मसजिद, चर्च, मंदिर की जगह अच्छे स्कूल, वैज्ञानिक संस्थानों की ज़रूरत है

मैं कहना चाहता हूँ कि आज जिन चीज़ों की आवश्यकता है वे मसजिद, चर्च या मंदिर नहीं, बल्कि अच्छे स्कूल, वैज्ञानिक संस्थान, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, अस्पताल आदि हैं जो देश को आगे ले जाएँगे, न कि हागिया सोफ़िया को मसजिद बनाने के क़दम जो एक राजनीतिक स्टंट से अलग कुछ नहीं है।
जस्टिस मार्कंडेय काटजू

मेरे विचार में तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोयान द्वारा प्रसिद्ध हागिया सोफ़िया को मसजिद में बदलने का फ़ैसला एक प्रतिक्रियावादी क़दम है, और इसकी निंदा की जानी चाहिए।

एर्दोयान ने यह नौटंकी इसलिए की क्योंकि तुर्की की अर्थव्यवस्था तेज़ी से डूब रही है। बेरोज़गारी एक रिकॉर्ड ऊँचाई पर है और तुर्क बड़ी संख्या में तुर्की छोड़कर दूसरे देशों में रोज़गार की तलाश के लिए पलायन कर रहे हैं। नतीजतन, एर्दोयान की लोकप्रियता तेज़ी से कम हो रही है।

1920 के दशक के प्रारंभ तक तुर्की एक ग़रीब, पिछड़ा, सामंती देश था, जो एक सुल्तान के शासन का नतीजा था जिसने इसे अपने फ़ायदे के लिए पिछड़ा बना रखा। इसे 'द सिक मैन ऑफ़ यूरोप' कहा जाता था, और यूरोपीय शक्तियों द्वारा इसे अक्सर बेइज़्ज़त किया जाता था।

ताज़ा ख़बरें

मुस्तफा कमाल जो एक सैन्य अधिकारी थे, ने महसूस किया कि उनके देश की यह दयनीय स्थिति इसके पिछड़ेपन का कारण थी, और उन्होंने देश की बागडोर अपने हाथ में लेने के बाद इसे आधुनिक बनाने का फ़ैसला किया। 1920 के दशक में उन्होंने शरिया क़ानून, बुर्का और मदरसों को ख़त्म कर दिया और तुर्की को एक आधुनिक धर्मनिरपेक्ष देश बनाया।

उन्होंने जिन सुधारों की शुरुआत की उनमें हागिया सोफ़िया का धर्मनिरपेक्ष होना और 1935 में इसे एक संग्रहालय बनाना था। यह अद्भुत इमारत बाईजेंटाइन साम्राज्य में एक चर्च हुआ करती थी जिसे 537 ईस्वी में सम्राट जस्टिनीयान द्वारा बनाया गया था। इसे 1457 में ऑटोमन सुल्तान मेहमद द्वितीय द्वारा कांस्टेंटिनोपल (आज  का इस्तांबुल) जीतने के बाद एक मसजिद में बदल दिया गया था।

विचार से ख़ास

अब राष्ट्रपति एर्दोयान घड़ी के कांटे घुमाकर वापस पहले की तरह एक धर्मनिरपेक्ष देश को इसलामिक देश में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। हागिया सोफ़िया को एक मसजिद में बदलने का उनका नवीनतम निर्णय, सस्ती लोकप्रियता पाने और अपनी असफल छवि को सुधारने की एक कोशिश है। यह क़दम वास्तव में जनता का ध्यान आर्थिक संकट से भटकाने के लिए है जिससे तुर्की गुज़र रहा है, और जिसका एर्दोयान को पता नहीं कि इसका हल कैसे किया जाए।

अंततः मैं कहना चाहता हूँ कि आज जिन चीज़ों की आवश्यकता है वे मसजिद, चर्च या मंदिर नहीं, बल्कि अच्छे स्कूल, वैज्ञानिक संस्थान, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, अस्पताल आदि हैं जो देश को आगे ले जाएँगे, न कि हागिया सोफ़िया को मसजिद बनाने के क़दम जो एक राजनीतिक स्टंट से अलग कुछ नहीं है।

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
जस्टिस मार्कंडेय काटजू
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

विचार से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें