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एफ़एटीएफ़ की ब्लैक लिस्ट से बचने के लिए पाक ने की दाऊद, हाफिज़ व मसूद पर कार्रवाई

फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) की ग्रे लिस्ट से बाहर आने के लिए छटपटा रहे पाकिस्तान ने 88 प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और उनके आकाओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है। इसी के साथ पाकिस्तान ने पहली बार कबूल किया है कि आतंकी डॉन दाऊद इब्राहिम उसके देश में है। 

इमरान ख़ान सरकार ने दाऊद, कुख़्यात आतंकी हाफिज़ सईद, मसूद अज़हर पर कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाए हैं। इमरान सरकार ने इनके बैंक खातों और संपत्तियों को सीज करने के आदेश दिए हैं। मार्च, 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों में दाऊद का हाथ था। इन बम धमाकों में 250 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 1200 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे। 

लेकिन देखना होगा कि क्या पाकिस्तान अब दाऊद को भारत भेजेगा। पिछले 27 साल से पाकिस्तान इसे लेकर झूठ बोलता रहा है कि दाऊद उसके देश में नहीं है। लेकिन आज उसका असली चेहरा बेनकाब हो गया है। 

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हाफिज़ सईद आतंकी संगठन जमात उद दावा का प्रमुख है और मुंबई के 26/11 के हमले का मास्टरमाइंड है जबकि मसूद अज़हर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना है और उसे वैश्विक आतंकी घोषित किया जा चुका है। 

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पाकिस्तानी के अंग्रेजी अखबार ‘द न्यूज’ ने कहा है कि इमरान ख़ान सरकार ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा जारी नई सूची का अनुपालन करते हुए यह कार्रवाई की है। 

पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी की गई सूची में तालिबान, हक्कानी ग्रुप, अल-क़ायदा जैसे कुख्यात आतंकी संगठनों के भी नाम हैं। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक़ मुल्ला फ़जुल्लाह, ज़की उर रहमान लखवी सहित कई आतंकियों का नाम इस सूची में है। 

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ब्लैक लिस्ट होने का दबाव 

एफ़एटीएफ़ ने पाकिस्तान को जून, 2018 से ग्रे लिस्ट में रखा हुआ है और उस पर इसके लिए भारी दबाव है कि वह आतंकी संगठनों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करे। इस साल जून में हुई एफ़एटीएफ़ की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया था कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में ही रखा जाए क्योंकि वह इस बात की जांच करने में फ़ेल साबित हुआ है कि आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद को पैसा कहां से मिल रहा है। 

एफ़एटीएफ़ कई देशों का संगठन है, जो आतंकवाद को वित्तीय मदद देने और मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों पर नज़र रखता है। 

पाकिस्तान को बेहद ख़राब आर्थिक हालात से निकलने के लिए एफ़एटीएफ़ की ग्रे लिस्ट से बाहर आना ही होगा और इसीलिए आतंकियों के ख़िलाफ़ इस तरह की कार्रवाई को करना उसके लिए ज़रूरी है।
क्योंकि अगर पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में बने रहता है तो उसके लिए इंटरनेशनल मोनेटरी फ़ंड (आईएमएफ़), विश्व बैंक, एडीबी आदि संस्थाओं से वित्तीय मदद हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। अगर पाकिस्तान अक्टूबर तक एफ़एटीएफ़ के निर्देशों के मुताबिक़ काम नहीं कर पाता है तो इस बात की संभावना है कि उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाए। 
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