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कोरोना से उबरा व्यक्ति भी सुरक्षित नहीं, दोबारा हो सकता है संक्रमित: डब्ल्यूएचओ 

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने चेताया है कि जिन्हें कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ और वे ठीक हो गए हैं उन्हें फिर से इसका संक्रमण हो सकता है। इसका मतलब है कि जिनका इम्युन सिस्टम यानी बीमारी से लड़ने की शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कोरोना से लड़ चुकी है यह ज़रूरी नहीं कि दोबारा कोरोना का शिकार नहीं हो। 

डब्ल्यूएचओ की यह चेतावनी उस संदर्भ में आयी है जिसमें कुछ सरकारों द्वारा इस पर विचार किया जा रहा है कि संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों को लॉकडाउन में अपना-अपना काम करने की छूट दी जा सकती है। इसके लिए कुछ सरकारें ऐसे लोगों को 'इम्युनिटी पासापोर्ट' जारी कर सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसे लोग यह मानकर कि वे न तो ख़ुद ख़तरे में हैं और न ही दूसरों के लिए ख़तरा हैं, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जारी मास्क पहनने जैसी सलाहों की अनदेखी कर सकते हैं। 

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डब्ल्यूएचओ की यह चेतावनी काफ़ी अहम इसलिए है कि कई देश अब इसकी जाँच कर रहे हैं कि उन लोगों के शरीर में कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडी यानी बीमारी से लड़ने की शरीर की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई है या नहीं। इसकी मौजूदगी यह संकेत देगी कि संबंधित व्यक्ति में पहले कोरोना का संक्रमण हुआ था और वह इस वायरस से ठीक हो चुका है। जर्मनी में ऐसे हज़ारों लोगों की जाँच की जा चुकी है और दूसरे कई देशों में भी ऐसी ही जाँच की तैयारी चल रही है। 

डब्ल्यूएचओ ने एक बयान जारी कर कहा है कि फ़िलहाल कोई सबूत नहीं है कि जो लोग कोरोना वायरस से ठीक हुए हैं और उनमें एंटीबॉडी विकसित हो गई है वे दूसरी बार संक्रमण से सुरक्षित हैं। 

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की यह चेतावनी इस लिहाज़ से भी काफ़ी महत्वपूर्ण है कि फ़िलहाल दुनिया भर में कोरोना वायरस का असर कम नहीं हुआ है। हर रोज़ क़रीब 80 हज़ार नये मामले सामने आ रहे हैं। अब कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या 30 लाख पहुँचने वाली है। दुनिया भर में 2 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हालाँकि क़रीब साढ़े आठ लोग ठीक भी हो चुके हैं। 

अब पश्चिमी देशों में या तो संक्रमण के मामले कम आने शुरू हो गए हैं या फिर स्थिर हो गए हैं। लेकिन अफ़्रीका, पूर्वी यूरोप और दूसरे क्षेत्रों में कई देशों में यह संख्या बढ़ रही है। ईरान जैसे कुछ देशों में तो फिर से संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं और इसके फिर से तेज़ी से फैलने के आसार हैं। ऐसे में क्या डब्ल्यूएचओ की चेतावनी की अनदेखी की जा सकती है?

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