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भारत की जीडीपी 3 से 9 प्रतिशत सिकुड़ सकती है, मैकिंजे ने दी चेतावनी

अर्थव्यवस्था के मार्चों पर आने वाले दिन बहुत ख़राब होने जा  रह हैं। रिज़र्व बैंक के बाद अब दुनिया की मशहूर प्रबध सलाहकार कंपनी मैंकिजे ने कहा है कि चालू साल में भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 3 प्रतिशत से 9 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है।
यह इस पर निर्भर करता है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की सरकारी कोशिशें कितनी कारगर होती हैं और उनका क्या नतीजा निकलता है। अगर ऐसा हुआ तो भारत की अर्थव्यवस्था की कमर पूरी तरह से टूट जायेगी और उसके उबरने मे बरसों लग जायेंगे। 
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बैंकों की स्थिति होगी बदतर

मैंकिजे ग्लोबल इनीशिएटिव ने 'इंडियाज़ टर्निंग पॉयंट' नाम की रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में बैंकों का 'बैड लोन' यानी जिस क़र्ज़ पर ब्याज न मिल रहे हों या जो पैसे डूब गए हों ऐसे क़र्ज़ में 7 से 14 प्रतिशत की वृद्धि होगी। 
इसकी वजह यह होगी कि छोटे व्यवसाय, कॉरपोरेट घराने और निजी क़र्ज लेने वालों की भी आर्थिक स्थिति खराब रहेगी और जब तक यह स्थिति नहीं सुधरती है, तब तक बैंकों को पैसे वापस नहीं मिलेंगे। हालांकि रिज़र्व बैंक ने कई तरह के उपायों का एलान किया है, उसका ख़ास असर नहीं होगा।
इस प्रबंधन कंपनी ने कहा है कि 2030 तक भारत को 8-8.50 प्रतिशत की आर्थिक विकास गति एक बार फिर हासिल करने के लिए अर्थव्यवस्था में कई तरह के सुधार करने होंगे। ड्यूटी, टैक्स, बिजली क्षेत्र से जुड़ी विसंगितयों को दूर करना होगा।

आर्थिक सुधार की ज़रूरत

मैंकिजे ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत को बीमा क्षेत्र, पेंशन फंड और पूंजी बाजार को और अधिक खोलना होगा। मैंकिजे का कहने का मतलब यह है कि भारत को बीमा और पेंशन फंड पूरी तरह निजी कंपनियों के हवाले कर देना होगा और विदेशियों को पूरी छूट देनी होगी।
मैकिंजे ने आशंका जताई है कि जीडीपी के सिकुड़ने और सरकार के वित्तीय घाटे बढ़ने का नतीजा दूरगामी होगा।मैंकिजे की यह रिपोर्ट रिज़र्व बैंक की सालाना रिपोर्ट के एक दिन बाद ही आई है। इसने जीडीपी में 3-9 प्रतिशत की कमी करने का अनुमान रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट के आधार पर ही लगाया है।
इसके पहले इनवेस्टमेंट बैंक बार्कलेज़ ने कहा था कि वित्तीय वर्ष 2021 में भारत के जीडीपी में 6 प्रतिशत की कमी आएगी।
प्रबंधन सलाह के क्षेत्र की अग्रणी कंपनी मैंकिजे ने कहा है कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी 3 प्रतिशत से 9 प्रतिशत तक सिकुड़ सकती है, यानी पहले से इतना कम कारोबार हो सकता है। यह इस पर निर्भर करता है कि सरकार की नीतियों और उपायों का क्या और कितना असर होता है।

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