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प्रतीकात्मक तसवीर।

यूपी चुनाव से पहले मुसलिम महिलाओं तक क्यों पहुँच रहा है आरएसएस? 

लगता है कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी द्वारा यूपी चुनाव में महिलाओं को केंद्रीय मुद्दा बनाने का दबाव बीजेपी और आरएसएस पर जबरदस्त पड़ा है। प्रियंका ने 'लड़की हूँ लड़ सकती हूँ', महिला आरक्षण समेत कई मुद्दे उठा कर और महिलाओं के लिए अलग घोषणापत्र जारी कर महिलाओं को जोड़ना शुरू किया तो बीजेपी की तरफ़ से प्रधानमंत्री मोदी ने भी जनसभाओं में महिलाओं को जोड़ने का प्रयास शुरू किया। अब आरएसएस मुसलिम महिलाओं को पार्टी से जोड़ने के प्रयास में जुट गया है।

आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उत्तर प्रदेश में मुसलिम महिलाओं के लिए एक व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम शुरू किया है। इस क़दम के तहत, आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने दो दिन पहले ही आरएसएस से जुड़े मुसलिम राष्ट्रीय मंच की महिला विंग की एक बैठक की अध्यक्षता की।

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वैसे तो कहा गया कि बैठक में मुसलिम महिलाओं के सशक्तिकरण और कल्याण से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ, लेकिन चुनाव से ऐन पहले इस तरह के कार्यक्रम का क्या मक़सद हो सकता है यह आसानी से समझा जा सकता है।

यह बैठक क्यों कराई गई यह इससे भी समझा जा सकता है कि इसमें सरकार के तीन तलाक़ को ख़त्म करने के लिए बनाए गए क़ानून जैसे फ़ैसलों को मुसलिम महिलाओं के लिए अहम बताया गया। संघ के नेता ने संवाददाताओं से कहा भी कि बैठक के दौरान मुसलिम महिलाओं ने 'तत्काल तीन तलाक के दर्द से मुक्ति' देने के लिए मुसलिम राष्ट्रीय मंच, अदालत और मोदी सरकार को धन्यवाद दिया।

आरएसएस नेता ने कहा कि मुसलिम महिलाओं ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि उन्हें पिछले 60 वर्षों में उन पार्टियों से क्या मिला है जिन्हें वे पसंद करते थे और वोट देते थे। उन्होंने कहा कि उन महिलाओं ने अन्य दलों से पूछा कि क्या वे तत्काल ट्रिपल तालक को फिर से लागू करेंगे।

आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने बाद में पीटीआई से कहा कि मुसलिम महिलाएँ सोशल मीडिया के माध्यम से बैठक के संदेश को समुदाय तक ले जाएंगी और लोगों को बीजेपी व आरएसएस की 'एक सही तसवीर' दिखाएंगे।

आरएसएस के मुसलिम महिलाओं तक पहुँच बनाने के प्रयास से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी में महिलाओं को आकर्षित करने का प्रयास शुरू कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी मंगलवार को प्रयागराज में मातृशक्ति के महाकुंभ में भाग लिया। उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद किया। 16 लाख सदस्यों वाले इन स्वयं सहायता समूहों को 1000 करोड़ रुपये दिए। उन्होंने तब यह भी कहा था कि महिलाएँ शादी की उम्र बढ़ाकर 21 साल करने के सरकार के फ़ैसले से खुश हैं। उन्होंने महिलाओं के लिए किए गए काम क बखान किया।

बीजेपी ने यह प्रयास तब शुरू किया है जब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूपी में कांग्रेस की चुनाव रणनीति महिला केंद्रित बनाई है। वह घोषणा कर चुकी हैं कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट देगी। उन्होंने विरोधी दलों पर महिलाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने केवल उनके बारे में बात शुरू की है। 

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प्रियंका ने उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए अलग घोषणा पत्र जारी किया है जिसमें घोषणापत्र को छह हिस्सों- स्वाभिमान, स्वावलंबन, शिक्षा, सम्मान, सुरक्षा और सेहत में बांटा गया है। चुनाव में महिलाओं के लिए 40 फ़ीसदी सीटों के अलावा, महिलाओं के लिए नौकरियों में 40 फ़ीसदी आरक्षण, कामकाजी महिलाओं के लिए विशेष छूट, खास कोटा, उनकी शिक्षा को बढ़ावा देने वाली योजनाएँ, महिलाओं के लिए निशुल्क सार्वजनिक परिवहन, पेंशन, महिलाओं की सुरक्षा और सेहत जैसे मुद्दों पर वादे किए गए हैं। 
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