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फ़ोटो साभार: ट्विटर/एजिजाबेथ मैकग्रॉ

दक्षिण कोरिया ने बिना लॉकडाउन-कर्फ्यू कैसे काबू किया कोरोना को?

कोरोना को काबू करना कोई दक्षिण कोरिया से सीखे। उसके पास इटली, अमेरिका और स्पेन जैसे विकसित देशों की तरह मज़बूत स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं है फिर भी इसने इन देशों व चीन की तरह सख्ती नहीं की। यानी बिना लॉकडाउन या कर्फ्यू लगाए ही इसने कोरोना को नियंत्रित कर लिया। इसका साफ़ मतलब यह है कि इसने न तो लोगों को कहीं आने-जाने से रोका-टोका और न ही किसी भी सेवा को बाधित किया। अब तक दुनिया के जिन दो देशों ने सबसे बेहतर तरीक़े से कोरोना संकट का सामना किया है वे हैं- चीन और दक्षिण कोरिया। लेकिन चीन ने न सिर्फ़ लोगों की आवाजाही, बल्कि कुछ बोलने पर भी सख़्त पाबंदी लगा दी। लेकिन दक्षिण कोरिया ने ऐसा कुछ नहीं किया। फिर भी दक्षिण कोरिया में जहाँ हर रोज़ 900 से ज़्यादा मामले आने लगे थे वहाँ अब हर रोज़ 60-70 मामले आ रहे हैं। वहाँ अब तक 9037 मामले आए और 120 लोगों की मौत हुई। कोरोना पीड़ितों की मृत्यु दर भी एक फ़ीसदी से कम है। जबकि दुनिया भर में यह औसत क़रीब 3-4 फ़ीसदी है। इटली में तो यह मृत्यु दर इसकी दोगुनी है। तो दक्षिण कोरिया ने ऐसा कैसे कर दिखाया? क्या इसके पीछे उसकी ज़बरदस्त तैयारी नहीं रही है? क्या यह चमत्कार जैसा नहीं है! और क्या भारत जैसे दूसरे देशों के लिए सबक़ नहीं है?

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कोरोना वायरस से लड़ने में दक्षिण कोरिया एक मिसाल साबित हुआ है। तभी तो विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ इससे दूसरे देशों को सीख लेने के लिए कहा रहा है। और तभी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टीफ़न लॉवन दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन से बात कर आग्रह कर रहे हैं कि वह इस वायरस से लड़ने के लिए उपायों की विस्तृत जानकारी उनके साथ साझा करें।

तो सवाल यही है कि दक्षिण कोरिया आख़िर ऐसी शानदार स्थिति में कैसे है? ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने इस पर रिपोर्ट बनाई है। दरअसल, कोरोना को काबू में करने का यह चमत्कार छिपा है उसकी तैयारी में। इसको चार भागों में बाँटकर समझ सकते हैं। 

पहला उपाय

जब जनवरी के आख़िर में पहला मामला सामने आया तो सरकारी अधिकारियों ने कई मेडिकल कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात की और आपातकालीन मंजूरी देने का वादा करते हुए उनसे आग्रह किया कि तुरंत ही वे कोरोना वायरस जाँच किट बनाना शुरू कर दें। जब देश में दो हफ़्ते के भीतर पॉजिटिव मामलों की संख्या दो अंकों में भी नहीं पहुँचा था तब उसने हज़ारों जाँच किट तैयार कर लिए थे। अब हर रोज़ एक लाख ऐसे किट को तैयार किया जा रहा है और दूसरे देशों को किट निर्यात करने के लिए बातचीत चल रही है। 

कोरोना वायरस से निपटने को लेकर दक्षिण कोरिया का नज़रिया बिल्कुल अलग है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के अनुसार, बातचीत में वहाँ के उप स्वास्थ्य मंत्री किम गंग-लिप कहते हैं, 'इस तरह के वायरस से लॉकडाउन और अलग-थलग करने पर ज़ोर देने का पुराना तरीक़ा प्रभावशाली नहीं है। एक बार जब यह आ जाता है तो पुराना तरीक़ा इसको फैलने से नहीं रोक सकता है।' 

इस तरह से उप स्वास्थ्य मंत्री साफ़-साफ़ कह रहे हैं कि जब तक स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जाए और जब तक आपके पास एक साफ़ दृष्टि नहीं है तब तक इसको रोकना बेहद मुश्किल है।

दूसरा उपाय

यह जाँच किट के उपलब्ध होने का नतीजा था कि इसने किसी भी देश से ज़्यादा लोगों की जाँच की है और ऐसे मरीजों को अलग-थलग कर इलाज किया है। दक्षिण कोरिया ने 3 लाख से ज़्यादा लोगों की जाँच की है जो प्रति व्यक्ति के स्तर पर अमेरिका से 40 गुना ज़्यादा है। इससे दक्षिण कोरिया की तैयारी का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। 

हॉस्पिटलों में भीड़ नहीं बढ़े इसके लिए इसने अतिरिक्त 600 जाँच केंद्र खोल दिए। सड़कों के किनारे भी। जहाँ कार चला रहे व्यक्ति को बिना कार से उतरे ही 10 मिनट में जाँच हो जाती है और घंटे भर में ही उसका परिणाम भी आ जाता है। बार-बार सार्वजनिक माध्यमों से जाँच कराने की सूचना दी जाती है। विदेशों से आए यात्रियों को स्मार्टफ़ोन एप डाउनलोड करना ज़रूरी होता है जो उन्हें ख़ुद से लक्षणों को पता लगाने में मदद करती है। होटलों और बड़ी बिल्डिंगों में तापमान मापकर ही प्रवेश दिया जाता है। 

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तीसरा उपाय

यदि किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो स्वास्थ्य कर्मी उस मरीज की आवाजाही की पूरी रिपोर्ट निकालते हैं कि वह कहाँ-कहाँ और कब गया था। फिर जो भी उसके संपर्क में आए हुए रहते हैं उनकी भी जाँच की जाती है और ज़रूरी होने पर उन सभी को अलग-थलग कर दिया जाता है। इससे तुरंत ही ऐसे लोगों का पता लगाने में सहायता मिलती है जिन्हें इस वायरस का संक्रमण हुआ हो। दक्षिण कोरिया ने इस प्रयोग को तब भी अपनाया था जब 2015 में मर्स (MERS) वायरस का प्रकोप आया था। स्वास्थ्य अधिकारी संबंधित व्यक्ति की आवाजाही का उनके क्रेडिट कार्ड रिकॉर्ड, सीसीटीवी कैमरे और उनकी कार और फ़ोन के जीपीएस डाटा से पता लगाते हैं। 

दक्षिण कोरिया के लोगों के मोबाइल फ़ोन वाइब्रेट होने लगते हैं यदि उनके ज़िले में कोरोना वायरस का कोई नया केस सामने आता है। वेबसाइट और मोबाइल फ़ोन ऐप पर इसकी जानकारी हर घंटे और कभी-कभी हर मिनट अपडेट की जाती है। इसमें यह जानकारी दी जाती है कि संक्रमित व्यक्ति किस समय कहाँ-कहाँ गया, कौन-सी बस या गाड़ी पकड़ी, और यहाँ तक कि वह व्यक्ति मास्क पहने हुए था या नहीं। जिन लोगों को लगता है कि वे उस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए होंगे वे अपनी जाँच करा लेते हैं। 

जिन लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होती है उनके लिए यह ज़रूरी होता है कि वे अपने फ़ोन में एक दूसरी ऐप डाउनलोड करें जो अधिकारियों को संक्रमित व्यक्ति के कहीं आने-जाने की जानकारी दे देती है। यदि कोई संक्रमित व्यक्ति इधर-उधर जाता है तो उस पर 2500 डॉलर का जुर्माना लगाया जाता है।

चौथा उपाय

चूँकि स्वास्थ्य कर्मी या शरीर का तापमान मापने के लिए लोग पर्याप्त नहीं हैं तो इस काम के लिए लोगों को लाने की व्यवस्था करनी होती है। वहाँ के नेताओं ने माना कि वायरस को रोकने के लिए ज़रूरी था कि लोगों को पूरी जानकारी हो और उनसे सहयोग माँगा जाए। इसके लिए सभी सार्वजनिक माध्यमों से लोगों को मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग की बार-बार अपील की गई। कई पोल सर्वे में यह बात सामने आई कि अधिकतर लोगों ने सरकार के प्रयासों की सराहना की, उनका विश्वास बना रहा और वे बहुत कम घबराए।

अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीयकृत स्वास्थ्य व्यवस्था से भी इसमें मदद मिली। कोरोना वायरस से जुड़े ख़र्च के बारे में भी विशेष प्रावधान किए गए, यहाँ तक कि जिनमें कोई लक्षण नहीं थे उनके द्वारा जाँच कराने पर विशेष प्रोत्साहन दिया गया। 

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कुल मिलाकर देखा जाए तो कोरोना से निपटने में दक्षिण कोरिया ने ज़बरदस्त तैयारी की और अपने संसाधनों का बेहतरीन उपयोग किया। उसने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। तकनीक का इस्तेमाल किया। राजनीतिक इच्छा शक्ति ज़बरदस्त रही। आम लोगों का भी ख़ूब सहयोग मिला और लोगों ने व्यवस्था पर विश्ववास बनाए रखा। यही वे वजहें हैं जिनसे दक्षिण कोरिया ने इस चमत्कार को कर दिखाया। और यही कारण है कि डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अधानोम ने दूसरे देशों को इससे सीख लेने को कहा है। लेकिन क्या भारत जैसे देश सीख ले रहे हैं, क्या ऐसी तैयारी है? क्या लॉकडाउन से ही सब ठीक हो जाएगा? जाँच किट जैसे मेडिकल सामग्री पर्याप्त हैं? क्या सरकार इस बारे में कुछ बता रही है?
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अमित कुमार सिंह
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