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महाराष्ट्र: सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वालों की अब ख़ैर नहीं, पुलिस ने दी ‘लास्ट वार्निंग’

सोशल मीडिया पर ‘प्रमुख व्यक्तियों’ के ख़िलाफ़ अनाप-शनाप लिखने वालों को महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने ‘लास्ट वार्निंग’ दी है। ऐसे 100 से ज़्यादा लोग हैं, जिन्हें पुलिस ने आगे से यह हरक़त न करने के लिए चेताया है। 

अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, साइबर पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 149 के तहत ऐसे लोगों को नोटिस भेजा है और कहा है कि यह ‘फ़ाइनल रिमाइंडर’ है और अगर अब ऐसा किया तो इसे संज्ञेय अपराध माना जाएगा। 

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साइबर पुलिस ने नोटिस में कहा है, ‘यह देखने में आया है कि कुछ यूजर्स सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपमानजनक, आपत्तिजनक, मानहानि करने वाली और घृणा फैलाने वाली पोस्ट डालने के लिए कर रहे हैं।’ पुलिस ने कहा है कि ऐसे लोगों को नोटिस भेजा गया है और इसमें कहा गया है कि ऐसा करना इंफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत अपराध है। 

नोटिस में लिखा है, ‘अगर कोई यूजर क़ानून के प्रावधानों का पालन नहीं करता है तो उसे कठोर क़ानूनी कार्रवाई भुगतनी होगी।’

एक अफ़सर ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, पुलिस द्वारा किसी तरह का क़ानूनी क़दम उठाने वाला अभियान चलाने से पहले ऐसे लोगों के लिए यह अंतिम मौक़ा है कि वे बाज़ आ आएं। एक सूत्र ने अख़बार से कहा कि साइबर पुलिस ऐसे लोगों पर नज़र रख रही है, जो ‘प्रमुख व्यक्तियों’ जिनमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी शामिल हैं, के ख़िलाफ़ लगातार आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट कर रहे हैं। 

आईजी (साइबर) यशस्वी यादव ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, ‘हम देख रहे हैं कि इतने नाजुक वक्त के दौरान भी कुछ लोग ऑनलाइन माध्यम से नफरत फैला रहे हैं। ये लोग सोचते हैं कि वे किसी की भी प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुंचा देंगे और उन्हें कुछ नहीं होगा।’ 

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यादव ने कहा कि यह नोटिस उन्हें ये बताने के लिए भेजा गया है कि वे जो कर रहे हैं, वह क़ानूनी अपराध है और उन्हें इसके लिए तीन साल तक की जेल काटनी पड़ सकती है। यादव ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस अब तक साइबर क्राइम को लेकर 400 मुक़दमे दर्ज कर चुकी है। 

इससे पहले महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा था कि ऐसे लोगों को भी नोटिस भेजे जाएंगे जो किसी महिला के सम्मान पर टिप्पणी करते हैं। 

यह शायद पहली बार है, जब किसी राज्य में पुलिस ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों को नोटिस जारी किए हैं। महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल का यह सख़्त रूख़ दिखाता है कि अगर दूसरे राज्यों की सरकारें चाहें तो वहां की पुलिस भी इस तरह के क़दम उठा सकती है।

‘ट्रोल आर्मी’ के लोगों पर नहीं होती कार्रवाई 

हमने देखा है कि सोशल मीडिया पर एक ‘ट्रोल आर्मी’ मौजूद है, जो उनकी राय से इत्तेफ़ाक न रखने वाले लोगों को दिन भर निशाना बनाती रहती है। यह ‘ट्रोल आर्मी’ किसी भी धर्म, जाति, समुदाय या किसी भी व्यक्ति को अपने मन के मुताबिक़ निशाना बनाती है और उसके ख़िलाफ़ बेहूदे, आपत्तिजनक पोस्ट करती है। यह ‘ट्रोल आर्मी’ न महिला देखती है, न पुरूष और उनका जमकर चरित्र हनन करती है। हैरान करने वाली बात यह है कि इन ट्रोलर्स के ख़िलाफ़ कहीं कोई कार्रवाई नहीं होती। 

ऐसे में कहा जा सकता है कि महाराष्ट्र की सरकार ने इस मामले में नज़ीर पेश की है कि दूसरी राज्य सरकारों को भी अपनी पुलिस को यह आदेश देना चाहिए कि सोशल मीडिया पर नफ़रत फैलाने वालों को अब क़तई बख़्शा नहीं जाएगा। 

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