जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े पर एक शेर याद हो आया- “बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले”। धनखड़ आज कहाँ हैं, ये किसी को नहीं मालूम। कोई कह रहा है कि वो नज़रबंद हैं, कोई कह रहा है कि वो कुछ समय के लिये अंडरग्राउंड हो गये हैं। हक़ीक़त क्या है, किसी को नहीं पता। लेकिन उनके इस्तीफ़े ने उपराष्ट्रपति का चुनाव ज़रूर करा दिया है। और ऐसा लगता है कि सरकार और बीजेपी ने उनके इस्तीफ़े से सबक़ लिया है और एक ऐसा उम्मीदवार दिया है जिनकी छवि काफ़ी साफ-सुथरी और बेदाग़ है। कई राज्यों के राज्यपाल रहने के बाद भी वो किसी विवाद में नहीं फँसे। सी पी राधाकृष्णन की तारीफ़ उनके विरोधी भी करते हैं। वो तमिलनाडु से दो बार सांसद रहे हैं और डीएमके का कहना है कि वो सही आदमी हैं, लेकिन ग़लत पार्टी में हैं। कभी ये बात अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में कही जाती थी।