आए दिन अख़बारों में खबर छपती है, जीएसटी वसूली बढ़ी। सरकारी विज्ञप्ति के आधार पर गैर बिज़नेस अख़बारों में भी यह ख़बर पहले पन्ने पर छप जाती है। आज 'द हिन्दू' जैसे अखबार में शीर्षक है, 'जीएसटी वसूली रिकार्ड ऊँचाई पर'।
केंद्र सरकार वसूली बढ़ने का ढिढोरा तो पीट रही है पर राज्यों का हिस्सा कम हो रहा है यह नहीं बता रही है। वसूली बढ़ने के दावों पर बात नहीं करने के लिए इतना भर ही कम नहीं है।
कोरोना और लॉकडाउन की वजह से तबाह भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। दिसंबर महीने में जीएसटी उगाही में 11.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह एक लाख करोड़ रुपए के ऊपर पहुँच गई।
बीजेपी और ग़ैर-बीजेपी राज्य जीएसटी के मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपना रहे हैं। ग़ैर बीजेपी राज्य केंद्र को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं, तो केंद्र सरकार अपने पहले के स्टैंड से टस से मस नहीं हो रही है।
चार गैर-बीजेपी शासित राज्यों ने बगाव़त करते हुए केंद्र सरकार से साफ़ शब्दों में कहा है कि उसके पास पैसे नहीं है तो वह बाज़ार से क़र्ज़ लेकर उन्हें पैसे दे, पर उन्हें हर हाल में पैसे चाहिए।
जीएसटी मुआवज़े के मामले में मोदी सरकार के रवैये को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने मोर्चा खोल दिया है। वे इसे धोखाधड़ी और संघवाद पर हमला बता रहे हैं। क्या इस मोर्चेबंदी से मोदी सरकार का रुख़ बदलेगा? वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की रिपोर्ट। Satya Hindi
आर्थिक मोर्चे पर मुश्किल दौर का सामना कर रही सरकार अब जीएसटी दरों में फिर कटौती कर सकती है। जीएसटी काउंसिल की आज होने वाली बैठक में इसकी घोषणा की जा सकती है।
प्रत्यक्ष कर उगाही लक्षय से कम है, इसी तरह जीएसटी उगाही भी लक्ष्य से कम है। इससे साफ़ है कि आर्थिक मंदी गहराती जा रही है। इससे वित्तीय घाटे के बढने की भी आशंका है।