डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद पर जो नौटंकी रचाई थी, उसका अंत तो हो चुका है और उन्होंने यह भी मान लिया है कि 20 जनवरी को डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जो बाइडन और कमला देवी हैरिस राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति की शपथ ले सकेंगे।
कोरोना से जैसा युद्ध भारत करेगा, वैसा कोई और देश करने की स्थिति में नहीं है। 30 करोड़ लोगों को फ़िलहाल टीका लगाने की तैयारी है। इतने लोग तो बस दो-तीन देशों में ही हैं। धीरे-धीरे भारत में 140 करोड़ लोगों को भी कोरोना का टीका मिल सकेगा।
ग़ाज़ियाबाद के मुरादनगर श्मशान घाट में छत गिरने से 25 लोगों से ज़्यादा की मौत हो गई और लगभग सौ लोग बुरी तरह से घायल हो गए। यह छत कोई 100-150 साल पुरानी नहीं थी।
जिन्ना के देश पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वाह प्रांत में एक कृष्ण मंदिर को भीड़ ने ढहा दिया। उस भीड़ को भड़काया मौलाना मोहम्मद शरीफ ने, जिसका कहना था कि किसी मुसलिम देश में मंदिरों को ढहाना तो पुण्य-कर्म है।
सरकार और किसान नेताओं के बीच अब जो बातचीत होने वाली है, मुझे लगता है कि यह आख़िरी बातचीत होगी। या तो सारा मामला हल हो जाएगा या फिर यह दोनों तरफ़ से तूल पकड़ेगा।
भारत के चार ख़ास प्रधानमंत्री किसी जाति, संप्रदाय, मज़हब, भाषा या वर्ग-विशेष के प्रतिनिधि नहीं थे। वे संपूर्ण भारत के प्रतिनिधि थे। वे प्रधानमंत्री थे, प्रचारमंत्री नहीं थे। वे प्रधानसेवक थे, प्रधानमालिक नहीं थे। वे सर्वसमावेशी थे, वे सर्वज्ञ नहीं थे।
कांग्रेस के नेता श्री मोतीलाल वोरा का 20 दिसंबर को 93वाँ जन्म दिन था और 21 दिसंबर को उनका निधन हो गया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नहीं बने थे फिर भी लगभग सभी राजनीतिक दलों ने उनके महाप्रयाण पर शोक व्यक्त किया।
देश के ज़्यादातर पढ़े-लिखे, शहरी और ऊँची जातियों के लोग स्वेच्छया ‘हम दो और हमारे दो’ की नीति पर चल रहे हैं लेकिन ग़रीब, ग्रामीण, अशिक्षित, मज़दूर आदि वर्गों के लोगों में अभी भी यह आत्म-चेतना जागृत नहीं हुई है।
देश के डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी है। किसान आंदोलन के बाद अब यह डॉक्टर आंदोलन शुरू हो गया है। इन दोनों आंदोलनों का आधार ग़लतफहमी है। इस ग़लतफहमी का कारण किसान और डॉक्टर नहीं है़।
किसान आंदोलन पर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रडो की प्रतिक्रिया के बाद भारत के विदेश मंत्री जयशंकर द्वारा कनाडा द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संवाद का भी बहिष्कार कर दिया गया है।
दिल्ली की जनता को फल और सब्जियां मिलना मुहाल हो रहा है और सैकड़ों ट्रक सीमा के नाकों पर खड़े हुए हैं। इससे किसानों को भी नुकसान हो रहा है और व्यापारी भी परेशान हैं।
ईरान के परमाणु-वैज्ञानिक मोहसिन फख्रीजाद की हत्या एक ऐसी घटना है, जो ईरान-इस्राइल संबंधों में तो भयंकर तनाव पैदा करेगी ही, यह बाइडन-प्रशासन के रवैए को भी प्रभावित कर सकती है।