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आपके कपड़े, जूते, बालों या अख़बार में तो नहीं है कोरोना वायरस?

कोरोना वायरस से कैसे बचें? यह फ़िलहाल पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा सवाल है। लेकिन इससे तभी बचेंगे न जब यह जानते हों कि कोरोना वायरस कहाँ-कहाँ हो सकता है। आपके कपड़ों में? जूतों में? बालों में? अख़बार में? आपके घर के फर्श पर? दरवाज़े की कुंडी में? सब्जी या दूसरे सामान लाने के लिए बाहर जा रहे हों तो हवा में? यदि वायरस इन जगहों पर है तो कितनी देर तक यह उतना सक्रिय रहता है कि हमें बीमार कर दे?

ऐसे ढेरों सवाल आपके मन में उमड़ रहे होंगे। कोरोना वायरस से बचने की कोशिश में लगा हर इंसान इन सवालों का जवाब चाहेगा। संक्रामक रोग विशेषज्ञ, एयरोसोल साइंटिस्ट यानी हवा में तैरते छोटे-छोटे कणों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक और सूक्ष्मजीवविज्ञानियों से 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने ऐसे सवालों के जवाब ढूँढने की कोशिश की है। आइए, हम आपको बताते हैं कि इन विशेषज्ञों का क्या कहना है। 

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हवा में वायरस?

विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोरोना का मरीज़ खाँसता या छींकता है तो उसके मुँह से हवा के साथ ड्रॉपलेट्स यानी लार के छोटे-छोटे कण निकलते हैं। इसमें से अधिकतर तो बड़े आकार होने के कारण ज़मीन पर बैठ जाते हैं, लेकिन बिल्कुल ही सूक्ष्म वाले कण हवा में तैरते रहते हैं। इन कणों के साथ वायरस भी हवा में तैर रहे होते हैं। कुछ शोध बताते हैं कि वायरस वाले ये कण क़रीब आधे घंटे तक सक्रिय रहते हैं। 

ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में क्वींसलैंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य की अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला की प्रोफ़ेसर और निदेशक लिडिया मॉरवास्का का कहना है कि बाहर हवा में यदि किसी के खाँसने या छींकने से कोरोना के कण होते भी हैं तो वे बाहर की खुली हवा में इतने छितराए होंगे कि इसका असर लोगों पर होने की संभावना नहीं है। 

बाहर से लौटकर कपड़ें बदलें और नहाएँ?

यदि हम सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हों तो दुकान, मेडिकल शॉप या ऐसी ही किसी जगह से बाहर से लौटते हैं तो कपड़े बदलने या नहाने की ज़रूरत नहीं है। हालाँकि हाथ को ज़रूर साबुन या ऐसी किसी चीज से धोना चाहिए। ऐसे में सवाल है कि जब आधे घंटे तक कोरोना वायरस हवा में तैरते रह सकता है तो कपड़े पर भी यह आ सकता है? 

इसके जवाब में एयरोसोल साइंटिस्ट डॉ. लिन्से मर्र कहती हैं कि जो वायरस वाले कण हवा में तैरने जितने छोटे होते हैं उनके सामान्य गति से चलते व्यक्ति के शरीर से टकराने की संभावना नहीं होती है।

सूक्ष्ण कण शरीर से क्यों नहीं टकराते?

क्योंकि जैसे ही हम चलते हैं हवा भी उस रास्ते से हटती जाती है और इस तरह से सूक्ष्ण कण के रूप में मौजूद वायरस भी। इसे कार के उदाहरण से समझ सकते हैं। जब कार बहुत धीमी गति से चल रही हो तो शरीर में हवा के टकराने का अहसास नहीं होता है क्योंकि हवा रास्ते से हटती जाती है, लेकिन वही कार जब तेज़ गति से चलती है तो हवा टकराने का अहसास होने लगता है। डॉ. मर्र कहती हैं कि इंसान ज़्यादा तेज़ नहीं चलता है। वह कहती हैं, 'जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, हम हवा को रास्ते से बाहर धकेलते हैं, और अधिकांश कणों को रास्ते से बाहर धकेल दिया जाता है। हमारे कपड़ों पर वायरस वाले कण को आने के लिए या तो सामने से कोरोना पीड़ित को बात करने के दौरान बड़ी मात्रा में वैसे कणों को बाहर निकालना होगा या फिर खाँसना या छींकना होगा। कणों को इतना बड़ा होना चाहिए कि वे हवा में तैर नहीं सकें।'

ऐसे में यदि आप बाहर जाते हैं और किसी ने आप पर खाँस या छींक दिया, तो आपको शायद कपड़े बदल लेना और नहा लेना चाहिए। 

बाल और दाढ़ी में वायरस का ख़तरा कितना?

यदि आप सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं तो इसके लिए चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन यदि किसी संक्रमित व्यक्ति ने सीधे आपके बालों पर खाँस या छींक भी दिया तो संक्रमण की संभावना नहीं है। लेकिन बालों से आपमें वायरस कैसे फैल सकता है इस पर संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ डॉ. एंड्रयू कहते हैं, 'फिर आपको अपने बालों या कपड़ों के उस हिस्से को छूना होगा, जिसमें वो कण हों...। फिर आपको उसे छूकर अपने चेहरे के किसी भी हिस्से को छूना होगा। जब आप इतनी प्रक्रियाओं से गुजरते हैं तो वायरस के कण काफ़ी कम हो जाते हैं। इससे जोखिम बहुत कम होता है।'

कपड़े धोएँ तो?

यह इस पर निर्भर करता है कि रुटीन के कपड़े हैं या किसी बीमार व्यक्ति के। कोरोना वायरस के ऊपर तेल जैसी एक सतह या ऊपर का कवच होता है जो सामान्य साबुन या डिटर्जेंट से निष्क्रिय हो जाता है। डॉ. मर्र कहती हैं कि कपड़ों को धोकर झाड़ें नहीं और पूरी तरह सूखने दें। रुटीन के कपड़े तो यूँ ही धो सकते हैं। लेकिन किसी बीमार के कपड़े धोते वक़्त ग्लव्स पहन लें और गर्म पानी में कपड़े धोकर अच्छी तरह सूखाएँ। 

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वायरस कितनी देर सक्रिय रहता है?

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसीन के मार्च में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार आदर्श स्थिति में सख़्त लोहे, स्टील या प्लास्टिक जैसी चीजों पर तीन दिन तक कोरोना वायरस सक्रिय रह सकता है। कार्डबोर्ड यानी मोटे कागज के डब्बे पर यह 24 घंटे सक्रिया रहता है। कपड़े के बारे में तो अध्ययन नहीं हुआ था, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि मोटे कागज की तरह इसमें गुण होते हैं। कपड़े और कार्डबोर्ड की अपेक्षा सख़्त चीज़ों पर वायरस लंबे समय तक सक्रिय रहता है। 

अख़बार, ख़त पढ़ें या नहीं?

अख़बार, ख़त या ऐसे किसी पैकेज से कोरोना वायरस के फैलने का ख़तरा न के बराबर है। हालाँकि इसके बावजूद सावधानियाँ बरती जानी चाहिए। पैकैज खोलने और अख़बार या ख़त पढ़ने के बाद अच्छी तरह हाथ धो लें। यदि आप इसके बाद भी सशंकित हैं तो न्यू इंग्लैंड जर्नल के शोध के अनुसार पैकैज खोलने और अख़बार या ख़त पढ़ने के लिए 24 घंटे तक इंतज़ार कर लें। 

जूतों का क्या करें?

जब आप बाहर से चलकर आते हैं तो वायरस के अलावा बैक्टीरिया भी जूते के सोल में ख़ूब होते हैं। चीन में अध्ययन हुआ तो कोरोना वार्ड में काम करने वाले क़रीब 50 फ़ीसदी लोगों के जूतों में कोरोना वायरस पाया गया। वैसे जूते पहनने से कोरोना संक्रमण का ख़तरा तो नहीं है, लेकिन हाथों से खोलने और पहनने के बाद अच्छी तरह हाथ धोना ज़रूरी है। 

यदि जूतों को धोया जा सकता है तो उन्हें साबुन या डिटर्जेंट से धोएँ और अच्छी तरह सूखाकर ही पहनें। लेकिन सबसे बेहतर उपाय तो यह है कि जूतों को घर के अंदर लाया ही नहीं जाए। 

हालाँकि, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने इस पर पूरी स्थिति साफ़ की है, फिर भी वे कहते हैं कि कोरोना से बचाव के लिए सभी तरह की सावधानियाँ बरती ही जानी चाहिए।

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क़मर वहीद नक़वी
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