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महाराष्ट्र: नाख़ुश है कांग्रेस, क्या ख़तरे में है उद्धव ठाकरे सरकार?

क्या महाराष्ट्र की महा विकास अघाडी सरकार में शामिल दलों के बीच कुछ खटपट चल रही है। संकेत कुछ ऐसे ही मिल रहे हैं क्योंकि कांग्रेस को ऐसा लगता है कि सरकार द्वारा लिए जा रहे अहम फ़ैसलों में उसे शामिल नहीं किया जा रहा है। कांग्रेस नेता इस मुद्दे पर बहुत जल्द राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिलकर बातचीत करेंगे। 

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, एक कांग्रेस नेता ने कहा, ‘मुख्यमंत्री ठाकरे एनसीपी प्रमुख शरद पवार के साथ बातचीत करके फ़ैसले करते हैं। यहां तक कि कोरोना संकट और निसर्ग तूफान के मामले में भी यही हुआ। इससे महाराष्ट्र कांग्रेस ऐसा महसूस कर रही है कि उसे किनारे किया जा रहा है।’ 

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पीटीआई के मुताबिक़, ठाकरे सरकार में शामिल कांग्रेस के एक मंत्री ने कहा, ‘पार्टी के अंदर कुछ मुद्दों को लेकर नाराजगी है और हम इन मुद्दों के समाधान के लिए मुख्यमंत्री से बातचीत करना चाहते हैं।’ 

एक अन्य नेता ने कहा कि पिछले साल नवंबर में सरकार का गठन होने के बाद जब मंत्रिपरिषद की शपथ हुई थी, तब यह तय हुआ था कि सभी की सत्ता और जिम्मेदारियां बराबर-बराबर होंगी। 

पीटीआई ने कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोराट और लोक निर्माण विभाग के मंत्री अशोक चव्हाण सोमवार को राज्यपाल के कोटे से विधान परिषद में नियुक्तियों, राज्य सरकार के बोर्डों और निगमों में नियुक्तियों और कांग्रेस के मंत्रियों को आ रही परेशानियों को लेकर मुख्यमंत्री से बातचीत करेंगे। 

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महाराष्ट्र में चल रहे इस सियासी घमासान की सुगबुगाहट कुछ दिन पहले भी मिली थी जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार में फ़ैसले लेने में कांग्रेस की प्रमुख भूमिका नहीं है। 

कोरोना संकट से जुड़े एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा था, ‘मैं एक बात का अंतर साफ करना चाहूंगा। हम महाराष्ट्र में सरकार का समर्थन कर रहे हैं लेकिन हम फ़ैसला लेने वाले प्रमुख लोगों में से नहीं हैं।’ 

राहुल ने कहा था, ‘हम पंजाब में फ़ैसले लेते हैं, छत्तीसगढ़, राजस्थान और पुडुचेरी में लेते हैं। सरकार चलाने और सरकार को समर्थन देने में अंतर होता है।’ बता दें कि इन राज्यों में कांग्रेस अपने दम पर सरकार चला रही है। 

तब यह माना गया था कि एक तरह से राहुल ने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार के बीच चल रही खींचतान से खुद को दूर ही रखने की कोशिश की थी। उन दिनों राज्य में ऐसी चर्चा थी कि लॉकडाउन को ख़त्म करने के मुद्दे पर पवार ठाकरे से नाराज थे। पवार चाहते थे कि लॉकडाउन ख़त्म हो लेकिन ठाकरे इसे बनाए रखना चाहते थे। 

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