loader

ट्विटर पर अमित शाह को हटाने की मांग करने वाले लोग कौन?

कहते हैं कि नफ़रत किसी को नहीं छोड़ती! मौजूदा समय में जिस सोशल मीडिया पर तेज़ी से नफ़रत फैलती है उसी सोशल मीडिया पर गृहमंत्री अमित शाह ट्रेंड कर रहे हैं। गृहमंत्री पर सवाल उठाए जा रहे हैं और उनको हटाने की मांग की जा रही है। यह जानकर आप चौंक जाएँगे कि उन पर सवाल उठाने वाले लोग कौन हैं!

दिल्ली में जहाँगीरपुरी हिंसा के बाद अमित शाह निशाने पर आए हैं। इसके बाद ट्विटर यूज़र उनके कार्यकाल में हुए दंगों और हिंसा की याद दिला रहे हैं। ट्विटर पर कुछ लोग तो कह रहे हैं कि वह गृहमंत्री के लायक नहीं हैं और कुछ लोग योगी तो कुछ लोग जनरल वीके सिंह, हिमंत बिस्व सरमा जैसे नेताओं को गृहमंत्री का पद देने की मांग कर रहे हैं।

ताज़ा ख़बरें

अमित शाह पर सवाल उठाने वाले लोग पूछ रहे हैं कि उनके गृहमंत्री रहते दिल्ली दंगे क्यों हुए? 26 जनवरी की हिंसा क्यों हुई? रामनवमी हमला क्यों हुआ? सीएए हिंसा क्यों हुई...?

अधिकतर जो इस तरह के सवाल उठाने वाले हैं, वे आम तौर पर दक्षिणपंथी विचारधारा वाले ही जान पड़ते हैं। उनके ट्विटर खातों पर पहले के ट्वीट से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वे अधिकतर हिंदुओं की रक्षा, उनके अधिकार की बात करते दिखते हैं और धार्मिक शोभायात्राओं को खुली छूट दिए जाने की वकालत करते हैं। 

डी. मुथुकृष्णन नाम के एक यूज़र ने अमित शाह को टैग करते हुए लिखा है, 'एक गृह मंत्री के रूप में आप दिल्ली में दंगों को नियंत्रण में रखने में बार-बार विफल हो रहे हैं। चाहे वह योगी आदित्यनाथ हों या हिमंत बिस्व सरमा, वे अपने राज्यों में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि आप दिल्ली दंगों को मुक्त रखने के लिए उनकी तरह सख्त बनें।'

खुद को सुदर्शन न्यूज़ टीवी की पत्रकार बताने वाली मीनाक्षी श्रीयान ने लिखा है, 'क्या दिल्ली को योगी जैसे कड़क शासक की ज़रूरत है?'

हालाँकि, ट्वीट करने वाले यूज़रों ने मुसलिमों के लिए नफ़रत की भाषा का इस्तेमाल भी किया है। संदीप देव नाम के यूज़र ने लिखा है, 'हमें केंद्र से लेकर देश भर के सारे प्रदेशों में उत्तरप्रदेश और असम जैसा शासक चाहिए जिनके शासन में नव संवत, रामनवमी और हनुमान जन्मोत्सव की शोभा यात्रा पर किसी जेहादी ने हमला करने की हिम्मत नहीं की।' 

अभिजीत मजूमदार नाम के यूज़र ने एंटी-सीएए प्रदर्शन, शाहीन बाग, दिल्ली दंगों, गणतंत्र दिवस की भगदड़, लाल किला मामले और जहाँगीरपुरी हमले का ज़िक्र करते हुए कहा है कि 'हर बार शक्तिशाली अमित शाह, उपराज्यपाल कार्यालय और दिल्ली पुलिस देश की राजधानी की रक्षा करने में नम्र, कमजोर और अक्षम दिखाई देते हैं। क्यों?'

भारत जोशी नाम के यूज़र ने अमित शाह पर सवाल उठाए हैं, "गृहमंत्री के रूप में अमित शाह की सक्रियता -

1. सीएए दंगे

2. दिल्ली दंगे

3. 26 जनवरी की हिंसा

4. शाहीन बाग

5. किसान प्रदर्शन मे 1 साल से हाईवे ब्लॉक

6. रामनवमी हमला

7. दिल्ली शोभायात्रा हमला"

शुभम शर्मा नाम के एक यूज़र ने लिखा है, 'जहांगीरपुरी दंगों के लिए हर कोई केजरीवाल को गाली क्यों दे रहा है? क़ानून व्यवस्था की ज़िम्मेदारी हमारे माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी की है। जब आप जानते हैं कि जहांगीरपुरी बांग्लादेशियों से भरा हुआ है तो आपने ड्रोन निरीक्षण या फ्लैग मार्च क्यों नहीं किया?'

प्रशांत नाम के यूज़र ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को टैग करते हुए ट्वीट किया है, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमित शाह को तुरंत हटाना चाहिए और जनरल वीके सिंह को गृह मंत्री नियुक्त करना चाहिए। भारत को क़ानून और व्यवस्था बहाल करने के लिए एक मज़बूत, अनुशासित सैनिक की सख्त ज़रूरत है। जिहादियों का तुरंत सफाया होना चाहिए। गृह मंत्रालय कोई पार्ट टाइम जॉब नहीं है। अमित शाह सिर्फ एक चुनाव प्रबंधक हैं।'

बता दें कि दिल्ली के जहांगीरपुरी में शनिवार शाम को हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तक 21 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हनुमान जयंती पर निकले जुलूस के दौरान दो समुदायों के लोगों के बीच झड़प हुई थी और और इस दौरान 8 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस ने कहा है कि गिरफ्तार किए गए लोगों से 3 देसी पिस्तौल और पांच तलवारें बरामद की गई हैं। इन सभी लोगों को अदालत के सामने भी पेश किया गया है।

सोशल मीडिया से और ख़बरें

दोनों ही समुदायों के लोगों ने एक दूसरे पर हिंसा करने का आरोप लगाया है। मुसलिम समुदाय के लोगों का कहना है कि हनुमान जयंती के जुलूस में शामिल लोगों के पास हथियार थे और उन्होंने मस्जिद में तोड़फोड़ की कोशिश की। जबकि हनुमान जयंती के जुलूस में शामिल लोगों का कहना है कि उनके पास हथियार थे लेकिन हिंसा के लिए मुसलिम समुदाय के लोग जिम्मेदार हैं क्योंकि उन्होंने उन पर पत्थर फेंके।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

सोशल मीडिया से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें