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क्या आंध्र प्रदेश में वोटरों को लुभाने के लिए आधार डाटा चोरी हुआ?

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के 7.82 करोड़ आधार कार्ड धारकों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी के चोरी होने के मामले से हड़कंप मचा हुआ है। हालाँकि दोनों राज्यों में चुनाव ख़त्म हो गये हैं, लेकिन आरोप यह लगाया जा रहा है कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए डाटा की चोरी काफ़ी पहले ही हो गयी थी। इस मामले के उजागर होते ही यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या वाक़ई आधार कार्ड की वजह से सरकार के पास लोगों के बारे में मौजूद जानकारियाँ सुरक्षित हैं? क्या कोई भी व्यक्ति या संस्था ये जानकारियाँ सरकार से चुरा सकती हैं?
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यह सारा मामला 2 मार्च, 2019 को उजागर हुआ जब लोकेश्वर रेड्डी नाम के एक शख़्स ने हैदराबाद पुलिस में यह शिकायत दर्ज़ करवायी कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के कई लोगों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ ‘आई ग्रिड्स’ नाम की एक कंपनी ने चुरा ली हैं। ‘आई ग्रिड्स’ पर आरोप लगाया गया कि करोड़ों लोगों के आधार कार्ड नंबर, उनके फ़ोटो, पैन कार्ड नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक खाता नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ सरकार से चुरा ली हैं। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज़ कर कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने ‘आई ग्रिड्स’ के दफ़्तरों पर छापे मारे और कई कम्प्यूटर, हार्ड डिस्क और दूसरे सामान ज़ब्त किए। इन सभी सामानों को जाँच के लिए फ़ोरेंसिक लैब भी भेजा गया है। पुलिस सूत्रों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि ‘आई ग्रिड्स’ के पास आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के लाखों लोगों से जुड़ी महत्वपूर्ण और गोपनीय जानकारियाँ हैं।

पुलिस इस जाँच में जुटी है कि क्या ये जानकारियाँ सरकार और उससे अनुबद्ध संस्थाओं से चुराई गईं या फिर सरकार के ही कुछ अधिकारियों से ये जानकारियाँ ‘आई ग्रिड्स’ को उपलब्ध कराई गयीं।

टीडीपी पर क्या लग रहे हैं आरोप

महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘आई ग्रिड्स’ ने ही तेलुगु देशम पार्टी का एप ‘सेवा मित्र’ बनाया। ‘आई ग्रिड्स’ ही इस एप का संचालन भी करती थी। ‘आई ग्रिड्स’ कंपनी के डी. अशोक तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे लोकेश के काफ़ी क़रीबी बताये जाते हैं। ‘आई ग्रिड्स’ पर सबसे बड़ा आरोप यही है कि उसने लोगों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों का इस्तेमाल चुनाव के दौरान तेलुगु देशम पार्टी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए किया।

आरोप लगाया जा रहा है कि चूँकि इस कंपनी के पास आधार कार्ड से जुड़ी सारी जानकारियाँ मौजूद थीं, उसने मतदाताओं को तेलुगु देशम पार्टी की ओर खींचने की हर मुमकिन कोशिश की। इन आरोपों का आधार यह है कि करोड़ों लोगों के मोबाइल नंबर भी आधार कार्ड से जुड़े हुए हैं, इसलिए तेलुगु देशम पार्टी ने इन मोबाइल नंबरों को पाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की।

क्या विदेशी कंपनियों को भी बेचा डाटा?

चौंकाने वाली बात यह है कि आधार कार्ड का डाटा होने की वजह से ‘आई ग्रिड्स’ के पास 7.8 करोड़ लोगों के मोबाइल फ़ोन नंबर, पैन कार्ड नंबर, बैंक खाता नंबर, गैस कनैक्शन नंबर जैसी जानकारियों के होने का भी अनुमान है। सूत्रों ने बताया कि भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई ने राज्य सरकारों को संबंधित राज्य के आधार कार्ड धारकों की जानकारी मुहैया कराई थी। अब हैदराबाद पुलिस को शक है कि या तो आंध्र प्रदेश सरकार से आधार कार्ड डाटा चोरी हुआ है या फिर एक साज़िश के तहत यह डाटा एक प्राइवेट कंपनी को दिया गया है। पुलिस को इस बात का भी शक है कि ‘आई ग्रिड्स’ कंपनी ने आधार कार्ड डाटा कुछ देशी और विदेशी कंपनियों को बेच भी दिया है। 

चूँकि मामला काफ़ी गंभीर है और इसका सीधा संबंध देश की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है, तेलंगाना पुलिस ने सारे मामले की जाँच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेटिंग टीम यानी एसआईटी बनाई है। यह टीम जाँच में यूआईडीएआई की भी मदद ले रही है।

प्राधिकरण ने साफ़ कह दिया है कि उसके यहाँ से डाटा के चोरी होने या फिर ग़ैर-क़ानूनी तरह से किसी को दिये जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। इसी वजह से शक की सुई ‘आई ग्रिड्स’, आंध्र प्रदेश सरकार और तेलुगु देशम पार्टी पर आकार रुकती है। पुलिस अभी तक ‘आई ग्रिड्स’ के मुखिया अशोक को गिरफ़्तार नहीं कर पायी है। मामले का आरोपी अशोक अब भी फ़रार है।

विरोधी दलों का आरोप

तेलुगु देशम पार्टी की विरोधी पार्टियों, ख़ासकर वाईएसआर कांग्रेस का आरोप है कि चंद्रबाबू नायडू ने ही अशोक को संरक्षण दिया हुआ है। वाईएसआर कांग्रेस का यह भी आरोप है कि तेलुगु देशम पार्टी के बड़े नेता सीधे तौर पर डाटा चोरी और उसके दुरुपोग में शामिल हैं। इसने यह भी आरोप लगाया कि अशोक की गिरफ़्तारी से सारे राज़ खुल जाएँगे, इसी वजह से तेलुगु देशम पार्टी के नेता उसे पुलिस की गिरफ़्त में आने से बचा रहे हैं। 

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टीडीपी का पलटवार

तेलुगु देशम पार्टी ने इसे दो राज्यों की सरकारों के बीच लड़ाई का रंग देने की भी कोशिश की है। तेलुगु देशम के नेताओं का आरोप है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष जानबूझकर आंध्र के मुख्यमंत्री नायडू और दूसरे नेताओं को परेशान करना चाहते हैं, इसी वजह से फ़र्ज़ी मामले बना रहे हैं। तेलुगु देशम का यह भी आरोप है कि तेलंगाना में डाटा सुरक्षित नहीं है और शायद डाटा तेलंगाना से ही चोरी हुआ हो।

चुनाव ख़त्म होने के बाद भी माहौल गरमाया

बहरहाल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में चुनाव हो चुके हैं लेकिन डाटा चोरी के इस मामले की वजह से राजनीतिक माहौल काफ़ी गरमाया हुआ है। तेलुगु देशम एक तरफ़ है और तेलंगाना राष्ट्र समिति और वाईएसआर कांग्रेस मिलकर एक तरफ़। दोनों पक्षों के बीच आरोप प्रत्यारोपों का सिलसिला जारी है। बीजेपी भी इस मामले को लेकर तेलुगु देशम पर क़रारे हमले बोल रही है। यह देखना दिलचस्प है कि क्या वाक़ई आधार कार्ड धारकों से जुड़ी जानकारियाँ चुरा ली गई हैं और वे अब सुरक्षित नहीं हैं? क्या यह आरोप भी सही साबित होगा कि एक सत्ताधारी पार्टी ने मतदाताओं को प्रभावित करने के मक़सद से आधार डाटा एक कंपनी को सौंप दिया?

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