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प्रज्ञा ने ईद पर मुसलमानों की दी बधाई, भोपाल के काज़ी से मिलीं

मुसलमानों पर हमले के मामले में अभियुक्त और भोपाल की नवनिर्वाचित सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने ईद पर मुसलिम समाज को चौंका दिया। वह बुधवार शाम अचानक भोपाल के शहर काज़ी सैयद मुश्ताक अली नदवी के निवास पर पहुँची। मिठाई का डिब्बा साथ लेकर आई  साध्वी ने शहर काज़ी और उनके परिजनों को ईद की बधाई दी।

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छोटी सी मुलाक़ात!

प्रज्ञा करीब पन्द्रह मिनट तक शहर काज़ी के निवास पर रहीं। इस दौरान उन्होंने नदवी के परिवार की महिलाओं और बच्चों से भी बातें कीं। इस मौके पर मुसलिम समाज के कई लोग और भाजपा के कार्यकर्ता मौजूद थे। साध्वी बिना सूचना के पहुँची थीं। समूचे मीडिया को भनक लगती इसके पहले ही मेल-मुलाक़ात का सिलसिला समाप्त हो गया और साध्वी वहाँ से निकल गईं। हालांकि कुछ मीडिया वाले वहाँ पहुँच गये थे।
मुख्यमंत्री रहते शिवराज सिंह हर ईद पर ईदगाह  जाते थे। शिवराज के साथ बीजेपी के स्थानीय विधायक और संगठन के कई नेता बिना नागा ईद पर  ईदगाह पहुँचा करते थे। पिता के देहावसान की वजह से शिवराज सिंह अपने गाँव गए हुए थे, मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेस के अनेक नेता अलबत्ता मौजूद रहे। सभी ने मुसलिम समुदाय के लोगों को ईद की बधाइयाँ दीं।

भोपाल के शहर काज़ी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने ‘सत्य हिन्दी’ से कहा, ‘ईद की बधाई देने साध्वी आयीं थीं। हमने उन्हें सिवैंया परोसीं, शहर के अमन और तरक्क़ी के लिये हर मुमकिन मदद का भरोसा दिलाया।’

साध्वी ने नहीं दी प्रतिक्रिया

ईद पर शहर काज़ी से हुई ख़ास मुलाक़ात के सिलसिले में ‘सत्य हिन्दी’ ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से भी संपर्क किया। उनका सेल फोन उठाने  वाले सहयोगी ने कहा, ‘फ़िलहाल बात हो पाना मुमकिन नहीं है।’ साध्वी के एक अन्य सहयोगी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘मालेगाँव बम ब्लास्ट मामले में शुक्रवार को मुंबई में दीदी की पेशी है। वह अस्वस्थ हैं। कोर्ट से छूट का अनुरोध किया था, लेकिन अनुमति नहीं मिल पायी है और वह मुंबई जाने की तैयारियों में व्यस्त हैं।’

बाबरी ढाँचा ढहाने का दावा

साध्वी प्रज्ञा सिंह पूरे चुनाव में प्रचार के दौरान सुर्खियों में रहीं। उनके कई  विवादास्पद बयानों पर खूब बवाल भी मचा। बाबरी ढाँचा ढहाने में शामिल होने के साध्वी प्रज्ञा सिंह के एक बयान पर चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भी दिया। मुंबई के जाँबाज पुलिस अफसर हेमंत करकरे को लेकर दिये गये बयान के बाद भी वह जम कर चर्चाओं में रही। चुनाव आयोग ने उनके प्रचार को 72 घंटों के लिए प्रतिबंधित भी किया।
भोपाल के चुनाव संपन्न हो जाने के बाद नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान पर सबसे ज़्यादा बवाल हुआ। बीजेपी ने इस बयान से स्वयं को दूर रखा। बाद में साध्वी ने माफ़ी भी मांगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक न्यूज़ चैनल को दिये गये अपने एक इंटरव्यू में कहा, ‘नाथूराम गोडसे वाले बयान पर वह मन से कभी भी प्रज्ञा सिंह को माफ़ नहीं कर पायेंगे।

सवाल यह उठता है कि आखिर साध्वी प्रज्ञा क्यों मुसलमानों को ईद की बधाई देने लगीं। क्या वह चुनाव जीतने के बाद अधिक ज़िम्मेदार हो गई हैं या ऐसा दिखने की कोशिश कर रही हैं? क्या वह मुसलमानों को संकेत देना चाहती हैं कि वह उनसे बेहतर रिश्ते चाहती हैं? पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह भी मुमकिन है कि साध्वी ने एक सोची समझी रणनीति के तहत ऐसा किया हो। वह मालेगाँव बम धमाका कांड में अभियुक्त हैं। हालाँकि नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रीय जाँच एजेन्सी ने अदालत से कहा कि प्रज्ञा के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं है, पर अदालत ने उसे फटकार लगाते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टि में सबूत हैं और यह एनआईए की ज़िम्मेदारी है कि वह पूरे मामले की जाँच कर सबूत एकत्रित करे। यह भी मुमकिन है कि प्रज्ञा के वकील अदालत के सामने यह साबित करने की कोशिश करें कि वह मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं हैं और उनके रिश्ते मुसलमानों से बेहतर हैं। असली मामला तो साध्वी को ही पता होगा।

संजीव श्रीवास्तव
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