loader
सपा नेता आजम खान। फाइल फोटो।

यूपी में आजम खान के ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे

आयकर विभाग ने बुधवार सुबह समाजवादी पार्टी नेता आजम खान से जुड़े कई परिसरों पर छापेमारी की। ये छापे लखनऊ, रामपुर, मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर और सीतापुर में की गई। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक छापेमारी जारी है। खबरों के मुताबिक, ये छापे अल जौहर ट्रस्ट को लेकर है। आयकर अधिकारियों ने बुधवार को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कम से कम 30 परिसरों की तलाशी ली। ये छापे आजम खान के खिलाफ कथित टैक्स चोरी की जांच का हिस्सा है।
पूर्व मंत्री आजम खान अल जौहर ट्रस्ट के प्रमुख हैं। इस साल की शुरुआत में, यूपी सरकार ने ट्रस्ट को एक रिसर्च सेंटर स्थापित करने के लिए रामपुर में दिए गए 3.24 एकड़ प्लॉट का पट्टा रद्द कर दिया। इस प्लॉट का पट्टा 2013-14 में ₹100 प्रति वर्ष के हिसाब से 30 साल से अधिक के लिए साइन किया गया था। अनियमितता के आरोप में सरकार ने इसे रद्द कर किया था। बहरहाल, रिसर्च सेंटर कई वजहों से शुरू नहीं हो पाया। आजम खान तमाम मुश्किलों में घिरते चले गए।
ताजा ख़बरें
सूत्रों का कहना है कि आजम के करीबी माने जाने वाले समाजवादी पार्टी के विधायक नसीर अहमद खान के घर पर भी तलाशी चल रही है।
यूपी में 2017 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से, आजम के खिलाफ रामपुर में भूमि कब्जा, धोखाधड़ी और आपराधिक अतिक्रमण सहित विभिन्न आरोपों में 81 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से कुछ मामलों में उनकी पत्नी और बेटे पर भी मामला दर्ज किया गया था। तीनों फिलहाल जमानत पर हैं।
इससे पहले जुलाई में, खान को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दर्ज हेट स्पीच मामले में दो साल जेल की सजा सुनाई गई थी। उन्हें अब तक तीन अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। इस वजह से उनकी विधानसभा की सदस्यता भी चली गई थी।
उत्तर प्रदेश से और खबरें
आजम खान सपा के वरिष्ठ नेताओं में से हैं और मुलायम सिंह यादव ने जब सपा खड़ी की तो उसमें आजम खान की प्रमुख भूमिका रही। आजम रामपुर से दस बार से ज्यादा विधायक रहे हैं और दो बार सांसद रहे हैं। उनकी पत्नी डॉ ताजीन खान भी सांसद रह चुकी हैं। उनका बेटा अब्दुल्लाह आजम भी विधायक रह चुका है। जब आजम ने जौहर यूनिवर्सिटी खोलने की घोषणा की तो वो तमाम परेशानियों में घिर गई। रामपुर में अब तक कोई यूनिवर्सिटी नहीं है। यहां के स्टूडेंट्स को या तो बरेली या फिर मुरादाबाद जाना पड़ता है। 
सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

उत्तर प्रदेश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें