loader
नई दिल्ली का आईटीओ चौराहा।

लॉकडाउन एक ग़लती, समाप्त करे सरकार

लॉकडाउन के बिना कोरोना वायरस हज़ारों भारतीयों को मार सकता है, लेकिन लॉकडाउन के कारण यह निश्चित तौर पर भुखमरी से लाखों लोगों को मार देगा। इसका कारण यह है कि लगभग 40-45 करोड़ लोग हमारी अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक/असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं- जैसे कि दिहाड़ी मज़दूर, प्रवासी कामगार इत्यादि। इन लोगों के पास नौकरी की कोई स्थायी सुरक्षा नहीं है, और उन्हें रोज़ाना खाने के लिए काम करना पड़ता है।
जस्टिस मार्कंडेय काटजू

25 मार्च से कोरोना वायरस के डर के कारण भारत एक राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में है, और अब स्थिति का एक बार फिर से आकलन करने का समय आ गया है।

क्या कोरोना एक ऐसा ख़तरा है जो देशव्यापी लॉकडाउन के लायक है? मेरा मानना है कि यह उतना गंभीर विषय नहीं है, और 24 मार्च की शाम को प्रधानमंत्री द्वारा देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा, विशेषज्ञों के साथ उचित परामर्श के बिना और इतने गंभीर निर्णय लेने के सभी पहलुओं पर विचार किए बिना एक जल्दबाज़ी की प्रतिक्रिया थी। हम इस मामले पर कुछ विस्तार से विचार कर सकते हैं।

यू.एस. सेंटर फ़ॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, फ्लू (इन्फ्लूएंजा) से हर साल दुनिया भर में लगभग 646,000 लोगों की मृत्यु होती है— यानी प्रति दिन लगभग 2000 लोगों की मृत्यु। इनमें से बड़ी संख्या में मौतें भारत में होती हैं।

2016 में, 20 करोड़ से अधिक लोगों को मलेरिया हुआ, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 700,000 मौतें (यानी लगभग 2,000 प्रति दिन मृत्यु) हुईं। इनमें से भी अधिकतर मृत्यु भारत में हुई।  

ताज़ा ख़बरें

सालाना लगभग 40 करोड़ लोग डेंगू से संक्रमित होते हैं, जिससे लगभग 22,000 लोगों की मृत्यु होती है, जिनमें ज़्यादातर बच्चे होते हैं।

हर साल 15 लाख लोग टी.बी. से मरते हैं, जिनमें से अधिकतर मृत्यु भारत में होती है।

सालाना 38 लाख लोग मधुमेह से मरते हैं।

2017 में, दुनिया में 96 लाख लोग कैंसर से मर गए। इनमें से बड़ी संख्या में मौतें भारत में होती हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 में, दुनिया में 82 करोड़ लोग भूखे पेट सोए, उनमें से अधिकांश भारतीय थे।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स और यूनिसेफ़ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 5 साल से कम उम्र के 48% बच्चे कुपोषित हैं, और इनमें से अधिकांश अपनी सारी ज़िंदगी कुपोषित रहेंगे। इससे आप कोई केवल भुखमरी से होने वाली मौतों का अनुमान लगा सकते हैं।

मैं कोरोना वायरस की गंभीरता पर संदेह नहीं कर रहा हूँ, लेकिन यह बताना चाहता हूँ कि भारत के लिए इसका ख़तरा बहुत बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया है (मैं अमेरिका और यूरोप का ज़िक्र नहीं कर रहा हूँ)।

कोरोना वायरस, लॉकडाउन के बिना हज़ारों भारतीयों को मार सकता है, लेकिन लॉकडाउन के कारण यह निश्चित तौर पर भुखमरी से लाखों लोगों को मार देगा। इसका कारण यह है कि लगभग 90% भारतीय वर्कफ़ोर्स (लगभग 40-45 करोड़ लोग) हमारी अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक/असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं- जैसे कि दिहाड़ी मज़दूर, प्रवासी कामगार इत्यादि। इन लोगों के पास नौकरी की कोई स्थायी सुरक्षा नहीं है, और उन्हें रोज़ाना खाने के लिए काम करना पड़ता है, अन्यथा वे और उनके परिवार भूखे रह जाएँगे। लॉकडाउन के कारण वे अपनी आजीविका से वंचित हो गए हैं। इसके परिणामस्वरूप खाद्य दंगे हो सकते हैं और क़ानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। पालघर में जो हुआ, उसे देश भर में दोहराया जा सकता है।

विचार से ख़ास

इस सबके अलावा, लॉकडाउन उन सभी लोगों के लिए भारी कठिनाइयों का कारण बन रहा है जो पूरे देश में फँसे हुए हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था, जो इस महामारी से पहले ही बुरी स्थिति में थी, राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण और ख़राब हो गई है।

मैं कहना चाहता हूँ कि अब सरकार को पूरे देश को लॉकडाउन करने की अपनी ग़लती को स्वीकार करते हुए लॉकडाउन को समाप्त करना चाहिए, अन्यथा समस्या वास्तव में और गंभीर हो जाएगी।

'सत्य हिन्दी'
सदस्यता योजना

'सत्य हिन्दी' अपने पाठकों, दर्शकों और प्रशंसकों के लिए यह सदस्यता योजना शुरू कर रहा है। नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से आप किसी एक का चुनाव कर सकते हैं। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है, जिसका नवीनीकरण सदस्यता समाप्त होने के पहले कराया जा सकता है। अपने लिए सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण को ध्यान से पढ़ें। हम भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता प्रमाणपत्र आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
जस्टिस मार्कंडेय काटजू
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

विचार से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें